'पंजाब आधा नहीं, पूरा सच जानने का हकदार', 'सतलुज' विवाद पर पहली बार बोले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू
बोले- आतंकवाद के दौर को एकतरफा नजरिये से नहीं देखा जा सकता; हिंसा का महिमामंडन नहीं होना चाहिए, पंजाब का भविष्य शांति और विकास में है
दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि फिल्म हटवाने के पीछे बिट्टू की भूमिका रही, हालांकि उन्होंने इस आरोप पर सीधे टिप्पणी नहीं की।
एक विशेष बातचीत में बिट्टू ने कहा कि पंजाब के आतंकवाद के दौर को केवल एक पक्ष से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा, "पंजाब आधा नहीं, पूरा सच जानने का हकदार है।"
'आतंकवाद के दौर की पूरी तस्वीर सामने आनी चाहिए'
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि फिल्म में 1980 और 1990 के दशक के पंजाब के हालात को एकतरफा ढंग से दिखाया गया है। उनके अनुसार, उस दौर का मूल्यांकन करते समय केवल सरकारी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आतंकवादी संगठनों द्वारा फैलाई गई हिंसा को भी समान रूप से याद रखना चाहिए।
उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उस समय सरकार पूरी तरह असहमति को दबा रही थी, जैसा फिल्म में दिखाया गया है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि खालड़ा उस दौरान अपना काम कैसे करते रहे और विदेश यात्राएं कैसे कर सके। उन्होंने कहा कि इस सवाल का भी ईमानदारी से जवाब मिलना चाहिए।
'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म या समुदाय से जोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के हाथों में मौजूद हथियार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए नहीं थे, बल्कि उनका इस्तेमाल पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि उस दौर के सभी पीड़ितों को याद रखना चाहिए, न कि केवल चुनिंदा लोगों को।
बेअंत सिंह सरकार का मकसद था शांति बहाल करना
बिट्टू ने कहा कि उनके दादा बेअंत सिंह ने ऐसे समय में पंजाब की कमान संभाली थी, जब राज्य हिंसा से जूझ रहा था। उनकी सरकार का पहला लक्ष्य कानून-व्यवस्था बहाल करना और लोगों को भयमुक्त वातावरण देना था। उन्होंने कहा कि शांति बहाल होने के बाद ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराए गए।
अत्याचार के आरोपों पर सबूत जरूरी
महिलाओं सहित आम लोगों पर कथित अत्याचारों के आरोपों के संबंध में बिट्टू ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों की पुष्टि विश्वसनीय साक्ष्यों और प्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए। इतिहास पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि केवल धारणाओं के आधार पर।
'हिंसा ने पंजाब को भारी नुकसान पहुंचाया'
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के वर्षों ने पंजाब को हजारों लोगों की जान, बर्बाद परिवार, चौपट कारोबार, निवेश में गिरावट और आर्थिक कठिनाइयों जैसी भारी कीमत चुकाने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि आज यदि लोग गैंगस्टरों से डरते हैं, तो आतंकवाद के दौर का भय उससे कहीं अधिक गंभीर था।
'क्या आप आज खालिस्तान का समर्थन करते हैं?'
फिल्म का समर्थन करने वालों से सवाल करते हुए बिट्टू ने कहा, "क्या आप आज खालिस्तान का समर्थन करते हैं? यदि जवाब नहीं है, तो हमें उसके नाम पर हुई हिंसा को भी अस्वीकार करना चाहिए और पंजाब के बेहतर भविष्य के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि शांति लौटने के बाद अतीत से 'मनोरंजन' करना आसान होता है, लेकिन जिन्होंने वह दौर देखा है, वे उस समय के डर और हिंसा को कभी नहीं भूल सकते।
बिट्टू ने अंत में कहा कि फिल्म को लेकर बहस से अधिक जरूरी पंजाब के भविष्य पर ध्यान देना है। उनके अनुसार, राज्य का भविष्य रोजगार, शिक्षा, निवेश और स्थिरता पर आधारित होना चाहिए, न कि पुराने जख्मों को बार-बार कुरेदने पर। उन्होंने कहा, "इतिहास पर बहस हो सकती है, लेकिन हिंसा का महिमामंडन कभी नहीं होना चाहिए। पंजाब की असली जीत शांति और लोकतंत्र की वापसी थी।"
