Punjab Congress Crisis: भूपेश बघेल ने वेणुगोपाल को सौंपी रिपोर्ट, बोले- नेतृत्व परिवर्तन ‘कठपुतली का खेल’ नहीं
Punjab Congress Crisis: वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद कहा- सभी नेताओं से चर्चा के आधार पर तैयार की रिपोर्ट, 2027 चुनाव से पहले संगठन पर जल्दबाजी में नहीं होगा फैसला
Punjab Congress Crisis: पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट एआईसीसी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल को सौंप दी। रिपोर्ट सौंपने के बाद बघेल ने स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव का कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं होगा और इसे "कठपुतली का खेल" नहीं माना जा सकता।
वेणुगोपाल से उनके आवास पर मुलाकात के बाद बघेल ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पंजाब में छह दिनों तक व्यापक स्तर पर पार्टी नेताओं से चर्चा की। पंजाब कांग्रेस कार्यालय में समूह बैठकों के अलावा कई नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात भी की गई। इन्हीं चर्चाओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर पार्टी नेतृत्व को सौंपी गई है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में बदलाव की अटकलों पर बघेल ने कहा कि अब तक वड़िंग ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व सभी सुझावों और फीडबैक पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही कोई निर्णय करेगा। इसी बीच पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा भी वेणुगोपाल के आवास पहुंचे, जहां राज्य इकाई में जारी संकट पर मंथन जारी रहा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब एक दिन पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और के.सी. वेणुगोपाल के साथ बैठक कर पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और आगे की रणनीति पर चर्चा की थी।
गौरतलब है कि 11 जुलाई को भूपेश बघेल ने पंजाब में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की थीं। इन बैठकों में शामिल 92 नेताओं, जिनमें विधायक और पूर्व विधायक भी शामिल थे, ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें राजा वड़िंग से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि वह 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता में वापस नहीं ला पाएंगे।
इन बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, संगत सिंह गिलजियां, अरुणा चौधरी, ओपी सोनी, परगट सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और भारत भूषण आशु सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।
अब कांग्रेस आलाकमान भूपेश बघेल की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद पंजाब संगठन से जुड़े मुद्दों पर अंतिम फैसला ले सकता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य इकाई में बढ़ती गुटबाजी पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

