Punjab Census Controversy : जनगणना की आधिकारिक सूची में 'जातिवादी' शब्दों पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त, पंजाब के जनगणना निदेशक को नोटिस
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष की शिकायत के बाद कार्रवाई, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट, जवाब न मिलने पर सिविल कोर्ट की शक्तियों का इस्तेमाल कर समन भेजने की चेतावनी
Punjab Census Controversy : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने आगामी जनगणना कार्यों के लिए तैयार की गई आधिकारिक सूची में जातिवादी शब्दों के इस्तेमाल का कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने इस संबंध में पंजाब के जनगणना निदेशक और पंजाब सरकार के सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और 15 दिन के भीतर अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
हरदीप सिंह गिल ने की थी शिकायत
नोटिस के अनुसार, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने 6 मई 2026 को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आगामी जनगणना के लिए तैयार की जा रही आधिकारिक सूची में जातिवादी शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसी शिकायत के आधार पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मामले की जांच करने का फैसला किया है।
15 दिन में जवाब नहीं तो समन
आयोग के उप निदेशक डॉ. आर. स्टालिन की ओर से 14 मई 2026 को जारी इस नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय 15 दिन के भीतर जवाब नहीं मिलता है, तो आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। इसके तहत अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से या उनके प्रतिनिधि को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी किया जा सकता है। अधिकारियों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग के पोर्टल, डाक या ईमेल के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
