PSRLM चयन प्रक्रिया पर हाई कोर्ट की रोक, अंकों के आवंटन में मिलीं प्रथमदृष्टया विसंगतियां
पंजाब ग्रामीण आजीविका मिशन की भर्ती में लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के अंकों को लेकर उठे सवाल; 2 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट रूरल लाइवलीहुड्स मिशन (PSRLM) के तहत चल रही चयन प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को अलग-अलग मदों में अंक दिए जाने के तरीके में “प्रथमदृष्टया कुछ विसंगतियां और अस्पष्टताएं” पाए जाने के बाद यह आदेश दिया।
मामला 2 सितंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। अदालत उस दिन चयन प्रक्रिया की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट और अंकों के आवंटन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार करेगी।
कोर्ट की निगरानी में हुई चयन प्रक्रिया की जांच
यह आदेश उस समय आया है जब करीब दो सप्ताह पहले न्यायमूर्ति मौदगिल ने PSRLM की पूरी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच कराने का आदेश दिया था। अदालत ने मूल भर्ती रिकॉर्ड को भी अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया था। उस समय अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया था कि भर्ती के लिए अधिसूचित चयन मानदंड का पालन नहीं किए जाने के संकेत हैं।
ताजा सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि न्यायालय द्वारा गठित समिति के प्रमुख अधिवक्ता विशाल शर्मा ने 28 जनवरी को जारी सार्वजनिक नोटिस के तहत हुई चयन प्रक्रिया से संबंधित आवेदन पत्रों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की। रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद न्यायमूर्ति मौदगिल ने चयन प्रक्रिया में आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
100 अंकों की थी चयन प्रक्रिया
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि निर्धारित चयन प्रक्रिया कुल 100 अंकों की थी। इसमें 70 अंक लिखित परीक्षा के लिए और शेष 30 अंक इंटरव्यू, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए निर्धारित थे।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन 30 अंकों के तहत अभ्यर्थियों को मिले अंक न तो दिए गए और न ही सार्वजनिक किए गए। इससे उम्मीदवारों के लिए यह जांचना संभव नहीं रहा कि उनका मूल्यांकन निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ या नहीं।
शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के अंक का रिकॉर्ड नहीं मिला
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पाया था कि भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए स्पष्ट रूप से अंक निर्धारित किए गए थे, लेकिन इन दोनों मदों में अंक दिए जाने का कोई समकालीन रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया।
अदालत ने इस चूक को “भर्ती प्रक्रिया की जड़ तक जाने वाला” बताते हुए पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और वैधता पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत के अनुसार, विज्ञापन में लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए अलग-अलग मूल्यांकन का प्रावधान था, लेकिन घोषित परिणाम में बाद की तीन मदों में से शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए दिए गए अंकों का अलग-अलग विवरण नहीं था।
सिर्फ कुल अंक बताए गए, हेड-वाइज विवरण नहीं
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि चयन नोटिस में केवल अभ्यर्थियों के कुल अंक दर्शाए गए थे और अलग-अलग मदों के तहत दिए गए अंकों का विवरण नहीं था। इससे अभ्यर्थियों को अपने मूल्यांकन की शुद्धता जांचने का अवसर नहीं मिला।
अदालत ने यह भी नोट किया था कि परिणाम या चयन नोटिस को किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर अथवा आधिकारिक मुहर से विधिवत प्रमाणित नहीं किया गया था। इसके बाद प्रतिवादियों को भर्ती से संबंधित पूरा मूल रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया।
मूल रिकॉर्ड की जांच में अदालत ने पाया कि मूल्यांकन रिकॉर्ड में केवल 70 अंक की लिखित परीक्षा और 10 अंक के इंटरव्यू का प्रारूप दर्ज था। विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए 10-10 अंक निर्धारित होने के बावजूद इन दोनों मदों के लिए अलग से मूल्यांकन या अंक आवंटन का रिकॉर्ड नहीं मिला।

