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Political Reform Demand: खड़गे ने सभी चुनावों की वैधता पर उठाए सवाल, लोकसभा-विधानसभाएं भंग करने की मांग की

Political Reform Demand: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग करने की मांग की और आरोप लगाया कि ये सभी चुनाव ''अवैध'' थे। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह...

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। फाइल फोटो
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Political Reform Demand: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग करने की मांग की और आरोप लगाया कि ये सभी चुनाव ''अवैध'' थे।

खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का पद पर बने रहना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि नये चुनाव मतपत्रों के जरिए कराए जाने चाहिए।

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खड़गे ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''आज पूरा देश अवैध चुनावों के आधार पर चलाया जा रहा है। मोदी अवैध प्रधानमंत्री हैं, शाह अवैध मंत्री हैं और जहां भी मुख्यमंत्री चुने गए हैं, वे सभी अवैध हैं। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग किया जाना चाहिए और चुनाव मतपत्रों के जरिए होने चाहिए।''

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खड़गे ने आरोप लगाया कि ईवीएम का दुरुपयोग किया जा रहा है और ''उनके अपने लोग'' भी ऐसा कह रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची की जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर प्रक्रिया और चुनावी प्रक्रिया के ''दुरुपयोग'' के खिलाफ देशभर में आंदोलन जारी रखेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने 30 सितंबर को हुई 'इंडिया' गठबंधन की बैठक का उल्लेख किया, जिसमें 20 दलों के सदस्य और उनके विधिक प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि सभी इस बात पर सहमत थे कि एसआईआर देश को गलत दिशा में ले जा रहा है और इसका गरीबों, अशिक्षितों, कामगारों और खासकर अल्पसंख्यकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

खड़गे ने सवाल किया कि यदि किसी मतदान केंद्र से 500 वोट हटा दिए जाएं तो यह किस तरह का स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब नाम जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कई लोग, खासकर भाजपा और आरएसएस के सदस्य, उन वार्डों, पंचायतों और गांवों में जा रहे हैं जहां वे चाहते हैं कि मतदाताओं के नाम हटाए जाएं और वहां इसके लिए फॉर्म भर रहे हैं। उन्होंने इसे ''पूरी तरह गलत'' बताया।

खड़गे ने कहा कि अतीत में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, नरसिंह राव और राजीव गांधी समेत किसी भी नेता ने लोकतंत्र में कभी ऐसे कदम नहीं उठाये। सरकार पर हमला जारी रखते हुए खड़गे ने कहा, ''लेकिन आप जिस तरह का दुरुपयोग कर रहे हैं, उससे हमारे युवाओं, गरीबों, दलितों और वंचित वर्गों को नुकसान हो रहा है।''

खड़गे ने कहा कि एक संपन्न व्यक्ति किसी तरह अपना काम करा सकता है, लेकिन अगर कुछ गलत हो जाए तो गरीब व्यक्ति को अपना काम छोड़कर उसे ठीक कराने या नवीनीकरण कराने के लिए जाना पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर 'लोकतंत्र की हत्या' करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने उस कानून का उल्लेख किया, जिसके तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों को पद पर रहते हुए लिए गए फैसलों के लिए कानूनी कार्रवाई से छूट दी गई है।

उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 का उल्लेख किया। खड़गे ने आरोप लगाया, ''इसलिए, मोदी जी और उनके लोगों ने एक कानून बनाया है और लोकतंत्र को नष्ट कर रहे हैं। पहले उन्होंने समिति की संरचना बदली। पूर्व की व्यवस्था में प्रधान न्यायाधीश, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री समिति के सदस्य होते थे।''

उन्होंने कहा, ''फिर 2023 में लाए गए एक कानून के जरिए उन्होंने प्रधान न्यायाधीश को हटा दिया और एक मंत्री को शामिल कर लिया। क्यों? क्योंकि कल अगर प्रधान न्यायाधीश उनसे सहमत नहीं होते और उस पद पर कोई ईमानदार तथा निष्पक्ष व्यक्ति बैठता है, तो वे कानून पारित नहीं करा पाएंगे या सीईसी की नियुक्ति नहीं कर पाएंगे।''

खड़गे ने कहा कि नए कानून के तहत अगर सीईसी या निर्वाचन आयुक्त कोई गलती करते हैं तो ''कहीं भी उनके खिलाफ कोई जांच नहीं हो सकती''। नयी दिल्ली में छह अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सभी विपक्षी सांसद निर्वाचन आयोग तक मार्च करेंगे और वे लोगों को जागृत करने के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।

चुनाव मतपत्र से कराए जाने की मांग पर जोर देते हुए खड़गे ने कहा, ''हमारा काम जनता को जागृत करना है। और उन्हें जगाने के बाद भी अगर आप 'मोदी, मोदी' कहते रहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप तानाशाही चाहते हैं।''

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