राहुल गांधी का अमित शाह पर तीखा हमला, बोले- 'लेक्चर' सुनने में दिलचस्पी नहीं, सिर्फ यह बताएं कि 'गोली चलाने' का आदेश किसने दिया
काल्पनिक बातें नहीं, जवाब चाहिए... राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा सीधा सवाल
Rahul Gandhi vs Amit Shah : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि विपक्ष को उनका ''लेक्चर'' सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बल्कि उन्हें सिर्फ यह बताना चाहिए कि दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था। उन्होंने कहा कि यदि शाह ने आदेश दिया था तो वह दोषी हैं और यदि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी तो 'अक्षम' हैं तथा इन दोनों ही परिस्थितियों में उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
गांधी ने कहा, ''पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी और मैंने संवाददाता सम्मेलन किया तथा अन्य विपक्षी दलों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि शाह की काल्पनिक बातें सुनने में हमें कोई दिलचस्पी नहीं है। हम उनका लेक्चर सुनने में दिलचस्पी नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''हमारी दिलचस्पी सिर्फ एक साधारण सवाल में है। और जब मैं 'हम' कहता हूं, तो इसका मतलब इस देश की युवा पीढ़ी से है। सवाल यह है कि दिल्ली में छात्रों पर गोली किसने चलवाई? एक छात्र को किसने अंधा कर दिया? छात्रों पर लाठियां चलाने का आदेश किसने दिया?'' उनका कहना था कि यह तो स्पष्ट है कि आदेश को गृह मंत्रालय ने लागू किया था।
गांधी ने कहा, ''क्या अमित शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर उन्होंने दिया था, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि इसके लिए वह दोषी हैं। और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिया था, तो उन्हें इसलिए इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह अक्षम हैं।'' उन्होंने दावा किया, ''अमित शाह 20 दिन के लिए गायब हो गए थे। उनके साथ संसद 30 गाड़ियां आती थीं और उनके घर के बाहर बहुत सारे पुलिस वाले खड़े रहते थे, ताकि कोई युवा न आ जाए।'' गांधी ने कहा, ''अमित शाह में हिम्मत नहीं है कि वह सदन में आएं।''
उन्होंने दावा किया, ''अमित शाह के गुब्बारे से हवा निकल गई है। अब आखिरी मिनट में फिर से हवा भरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गुब्बारा तो फट चुका है।'' इससे पहले, शाह ने बुधवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्ष छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो तो वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं तथा सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। बीते 20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा होने ही नहीं देना चाहता।

