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शीतकालीन सत्र के पहले दिन खिले ‘सियासी रंग’

हरियाणा विधानसभा केसरिया पगड़ी में सीएम, कांग्रेस-इनेलो ने दिखाई ‘हरियाली’

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पारिवारिक विवादों में सवाल होता है कि पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति पर पोते का कितना हक है? हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के इस मामले पर अदालती फैसले स्पष्ट करते हैं कि पैतृक संपत्ति में पोते का जन्मसिद्ध अधिकार है, वह दादा या पिता के जीवित रहते बंटवारा करवा सकता है। जबकि दादा की स्व-अर्जित संपत्ति पर उसका जन्मजात दावा नहीं।
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हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत पर बृहस्पतिवार को ‘सियासी रंगों’ की छटा बिखरी हुई दिखी। पहले ही दिन यह साफ हो गया कि यह सत्र केवल सवाल-जवाब और विधेयकों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि प्रतीकों, पहनावे और संदेशों की राजनीति भी केंद्र में रहेगी।

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कुर्ता-पायजामा और जैकेट के साथ केसरिया पगड़ी बांधकर विधानसभा पहुंचे। सांस्कृतिक, धार्मिक प्रतीक के अलावा इसमें राजनीतिक संकेत भी छिपा हुआ था। दरअसल, सिख गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर हरियाणा सरकार ने राज्य में कई आयोजन किए थे। मानसून सत्र में संकल्प-पत्र भी पेश किया गया था। अब शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन संसदीय कार्य मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ने इससे जुड़ा प्रस्ताव सदन में रखा। माना जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री पगड़ी पहनकर पहुंचे, ताकि सरकार की ओर से सिख समाज के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता का संदेश दिया जा सके।

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गौर हो कि सीएम सैनी को भाजपा नेतृत्व ने पंजाब में भी सक्रिय किया हुआ है। पंजाब में विधानसभा चुनाव फरवरी-2027 में प्रस्तावित हैं। बिहार के बाद भाजपा नेतृत्व की नजरें अब पंजाब पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि पंजाब में पिछड़ा वर्ग और विभिन्न सामाजिक समूहों को साधने के लिए नायब सिंह सैनी को एक अहम टास्क सौंपा गया है।

उधर, कांग्रेस के पांच युवा विधायक एक जैसी हरे रंग की जैकेट पहनकर विधानसभा पहुंचे और देखते ही देखते चर्चाओं के केंद्र में आ गए। इन विधायकों को रोहतक सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का ‘पंचरत्न’ माना जाता है। ये हैं- महम से बलराम दांगी, बरोदा से इंदूराज नरवाल ‘भालू’, कलायत से विकास सहारण, नारनौंद से जस्सी पेटवाड़ और गुहला-चीका से देवेंद्र हंस शामिल हैं। सदन में पहुंचने से पहले इन सभी ने पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी मुलाकात की। इसे संयोग कहें या प्रयोग कि इन पांचों विधायकों की जैकेट के डिजाइन भी समान थे। माना जा रहा है कि इस सामूहिक पहनावे के जरिये युवा नेतृत्व, एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का संदेश देने की कोशिश की गई। हालांकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद गुलाबी पगड़ी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके करीबी विधायकों का एक ही रंग की जैकेट में विधानसभा पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस के भीतर युवा नेताओं को आगे लाने और उन्हें अलग पहचान देने की तैयारी चल रही है।

पारिवारिक विवादों में सवाल होता है कि पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति पर पोते का कितना हक है? हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के इस मामले पर अदालती फैसले स्पष्ट करते हैं कि पैतृक संपत्ति में पोते का जन्मसिद्ध अधिकार है, वह दादा या पिता के जीवित रहते बंटवारा करवा सकता है। जबकि दादा की स्व-अर्जित संपत्ति पर उसका जन्मजात दावा नहीं।
पारिवारिक विवादों में सवाल होता है कि पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति पर पोते का कितना हक है? हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के इस मामले पर अदालती फैसले स्पष्ट करते हैं कि पैतृक संपत्ति में पोते का जन्मसिद्ध अधिकार है, वह दादा या पिता के जीवित रहते बंटवारा करवा सकता है। जबकि दादा की स्व-अर्जित संपत्ति पर उसका जन्मजात दावा नहीं।

इधर, इनेलो विधायक दल के नेता और डबवाली से विधायक आदित्य देवीलाल तथा रानियां विधायक अर्जुन चौटाला हरे रंग की पगड़ी पहनकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि इनेलो विधायक अक्सर सत्र के पहले दिन इसी तरह के पहनावे में नजर आते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इनेलो ने जैसे पहले दिन के लिए एक तरह का ‘ड्रेस कोड’ ही तय कर रखा है, ताकि पार्टी की अलग पहचान बनी रहे और कार्यकर्ताओं को भी एकजुटता का संदेश मिले। कुल मिलाकर हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र का पहला दिन कार्यवाही से ज्यादा प्रतीकों और संकेतों के नाम रहा।

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