Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

PNB Scam : प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, UK कोर्ट ने नहीं मानी नीरव मोदी की दलील

नीरव मोदी 19 मार्च, 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
नीरव मोदी
Advertisement

ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने भारत सरकार द्वारा दिए गए ''आश्वासनों की गुणवत्ता'' पर भरोसा करते हुए भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ मामले को फिर से खोलने की याचिका को खारिज कर दिया। लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस जे की पीठ ने बुधवार को अपराध प्रक्रिया नियमों के तहत प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी की अपील पर मामले को फिर से खोलने से इनकार कर दिया।

कहा कि सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत द्वारा दिए गए कूटनीतिक हलफनामे ने ''व्यापक, विस्तृत और प्रामाणिक'' आश्वासन दिए हैं। पंजाब नेशनल बैंक से 13,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में वांछित नीरव मोदी ने रक्षा सलाहकार संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले में फरवरी 2025 में आए फैसले के आधार पर अपने मामले को फिर से खोलने के लिए लंदन की अदालत से संपर्क किया था। ब्रिटेन की अदालत ने भारतीय एजेंसियों द्वारा यातना दिए जाने की आशंका का हवाला देते हुए भंडारी के प्रत्यर्पण को रद्द कर दिया गया था।

Advertisement

ब्रिटेन की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब मोदी का मामला 2022 में हमारे सामने आया तो भंडारी मामले में दिए गए फैसले के आधारभूत तथ्य या तो उपलब्ध नहीं थे या हमारी जानकारी में नहीं लाए गए थे। भंडारी मामले में इस अदालत का फैसला प्रतिबंधित तरीकों के इस्तेमाल से इकबालिया बयान हासिल करने की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। इसका प्रधान आधार दो दिसंबर, 2025 को भारत के गृह मंत्रालय द्वारा ब्रिटेन की सरकार को भेजा गया एक 'नोट वर्बल' है जिस पर संयुक्त सचिव राकेश पांडेय के हस्ताक्षर हैं।

Advertisement

इसमें आश्वासन दिया गया है कि नीरव मोदी से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गंभीर धोखाधड़ी जांच अधिकारी (एसएफआईओ), राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) पूछताछ नहीं करेंगे। 'नोट वर्बल' एक औपचारिक संदेश होता है जो आमतौर पर दूतावासों और विदेश मंत्रालयों के बीच सूचना, अनुरोध या विरोध व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें नीरव मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखने की विस्तृत योजना शामिल है। इसमें उसे मिलने वाली सुविधाओं और कानूनी मदद का भी विवरण है। अदालत ने कहा कि इसके बाद 12 फरवरी, 2026 को भारतीय उच्चायोग के एक नोट वर्बल में इस बात पर जोर दिया गया है कि आश्वासन बाध्यकारी हैं और भारत में सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियां या प्राधिकार इनका ईमानदारी से पालन करेंगे।

इसके अलावा ये आश्वासन भारत में अदालतों के माध्यम से भी लागू किए जाने वाले हैं। अदालत ने कहा कि अगर नोट वर्बल में ये बयान और आश्वासन नहीं दिए जाते तो हम विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इस अपील पर मामले को फिर से खोलने पर विचार कर सकते थे। नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पीएनबी के साथ कथित तौर पर 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। वह 19 मार्च, 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है।

Advertisement
×