Parvati Project Tunnel Leak: सैंज में सड़क पर आया मलबा, 7 दिन से आवाजाही बंद; पर्यटक फंसे
Parvati Project Tunnel Leak: पार्वती जल विद्युत परियोजना के एडिट-5 से निकले पानी-मलबे से सड़क का 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त; होमस्टे, टैक्सी और दुग्ध कारोबार पर असर
Parvati Project Tunnel Leak: जिला कुल्लू की सैंज घाटी में पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो के एडिट-5 की सुरंग से हुए 19 सितंबर को जल रिसाव के कारण सड़क पर मलबा आ गया था। जिससे स्थानीय लोगों के लिए संकट उत्पन्न हो गया है। 7 दिन से सड़क बंद रहने के कारण होमस्टे संचालकों, दुग्ध उत्पादकों और जीप-टैक्सी संचालकों का लगभग 15 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। सड़क बंद होने से पर्यटकों की आवाजाही भी रुक गई है, जिससे कई पर्यटन इकाइयों की बुकिंग रद हो रही हैं।
एडिट-5 से निकले पानी और मलबे के कारण आरडी 14000 के पास सड़क का लगभग 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। जिससे वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई है। दुग्ध उत्पादकों को दूध बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, और टैक्सी संचालकों की रोजाना की कमाई ठप हो गई है।
ग्राम पंचायत रैला -2 में द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार 7 दिन में टैक्सी संचालकों को करीब 1.62 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा कई वाहन अब भी सड़क के दोनों ओर फंसे हैं। पंचायत के द्वारा तहसीलदार सैंज नरेंद्र कुमार को यह रिपोर्ट सौंप दी है। वही, अब पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को जल्द राहत और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
पार्वती परियोजना चरण दो के एडिट-5 के पास सुरंग लीकेज के बाद सड़क पर आए मलबे ने रैला पंचायत के भटकांडा गांव में घूमने पहुंचे पर्यटकों की परेशानी बढ़ा दी है।
इस सड़क के बंद होने के कारण जयपुर, उत्तर प्रदेश, असम व तमिलनाडु से आए करीब 15 पर्यटक आठ दिन से भटकांडा में फंसे हैं। ऐसे में अब पर्यटक लगातार सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मार्ग बहाल न होने से उनकी आगे की यात्रा अटक गई है।
भाटकंडा गांव के रैबिट होमस्टे में ठहरे सैलानी ऋषिकेश, रिदम गुप्ता, पीयूष, आदर्श नारायण, माधव गुप्ता, मदीक्षा शर्मा और भावेश वर्मा ने बताया कि वे कई दिन से सड़क बहाली की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लंबे समय तक रुकने के कारण ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च हो रहा है। इससे उनका यात्रा बजट बिगड़ गया है। पर्यटकों ने प्रशासन से सिउंड-रैला-कमटन सड़क को जल्द बहाल करने की मांग की है।
स्थानीय किसान ज्ञान सिंह ने बताया कि सड़क को बंद हुए आज 7 दिन का समय हो गया है लेकिन अभी तक इसे बहाल नहीं किया गया है। ज्ञान सिंह का कहना है कि सड़क के बंद होने के चलते लोगों को पैदल ही अपने घरों की ओर राशन ले जाना पड़ रहा है। इसके अलावा स्थानीय दुकानदारों, होम स्टे संचालकों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। एनएचपीसी के टनल का एडिट नंबर पांच का वॉल्व लीक होने के चलते यह सारा मलबा आया हुआ है। लेकिन प्रशासन और एनएचपीसी अभी ग्रामीणों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
टैक्सी चालक चमन लाल का कहना है कि सड़क बंद होने के चलते उनकी टैक्सी भी फंस गई है और रोजाना उन्हें हजारों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एनएचपीसी की लापरवाही के चलते यह सारा मलबा सड़क पर आ गिरा। ऐसे में अगर जल्द ही सड़क बहाली का कार्य नहीं किया गया तो दो पंचायत के लोग मिलकर धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
रैला -2 पंचायत के स्थानीय निवासी मंगत राम ने बताया कि एनएचपीसी की लापरवाही के चलते यहां लोगों का लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। ऐसे में अगर एनएचपीसी लोगों के नुकसान की भरपाई नहीं करती है। तो सभी ग्रामीण मिलकर एनएचपीसी के कार्य को बंद करने के लिए मजबूर होंगे। सड़क बहाल न होने के चलते यहां लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
ग्राम पंचायत रैला के प्रधान टेक सिंह ठाकुर ने बताया कि 7 दिन बीतने के बाद भी अभी तक प्रशासन की ओर से भी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। दो पंचायत के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को लिखित मांग पत्र भी सौंपा था और एनएचपीसी के अधिकारियों से भी बात की गई थी। लेकिन अभी तक ना तो ग्रामीणों के नुकसान की भरपाई हो पाई है और ना ही सड़क बहाली की दिशा में कोई कदम उठाया गया है। जिससे दो पंचायत के लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत रैला-2 के प्रधान डाबे राम राणा ने बताया कि एनएचपीसी के लापरवाही के चलते यहां 15 लाख रुपए के नुकसान का आकलन पंचायत के द्वारा किया गया है और यह रिपोर्ट तहसीलदार सैंज को भी भेजी गई है। सड़क बंद होने के चलते यहां होमस्टे की बुकिंग बंद हो गई है और कई सैलानी भी यहां पर फंसे हुए हैं। गांव में दूध के रोजगार से जो महिलाएं जुड़ी हुई है। उनका दूध भी सड़क बंद होने के चलते बाजार नहीं पहुंच पा रहा है। टैक्सी चालकों की टैक्सियां फंसी हुई है। जिसके चलते उन्हें भी लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एनएचपीसी के द्वारा अब अगर जल्द ही नुकसान की भरपाई नहीं की गई। तो सभी ग्रामीण मिलकर एनएचसी के पावर हाउस के कार्य को बंद कर देंगे।

