Parliament Session: विपक्ष ने संसद में पश्चिम एशिया के युद्ध के हालात पर चर्चा की मांग की
Parliament Session: कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे भाग के लिए अपनी रणनीति पर चर्चा की और ईरान एवं अमेरिका-इस्राइल के बीच युद्ध से जुड़े हालात को लेकर चर्चा...
Parliament Session: कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे भाग के लिए अपनी रणनीति पर चर्चा की और ईरान एवं अमेरिका-इस्राइल के बीच युद्ध से जुड़े हालात को लेकर चर्चा की मांग पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य देने भर से विषय का समाधान नहीं होगा। जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर वक्तव्य दिया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "बजट सत्र के दूसरे भाग की बैठक उस वक्त हो रही है, जब ईरान के साथ अमेरिका-इस्राइल का युद्ध हमारी दहलीज तक पहुंच गया है। ऐसे में मौजूदा भू-राजनीतिक संकट पर संपूर्ण चर्चा होना जरूरी है।"
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री का एकतरफा बयान समाधान नहीं है। खड़गे ने कहा, "हमें सामूहिक रूप से देश को विश्वास में लेने की जरूरत है। भारत सरकार को हमारी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, हमारे व्यापारियों की सहायता करने, हमारे निर्यात के लिए आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और महंगाई की मार को रोकने के लिए एक विस्तृत योजना बनानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि विपक्ष भारत के लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए जाने की मांग करता है।
विपक्षी नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट मामले पर संसद परिसर में प्रदर्शन किया
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर सोमवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया।
संसद भवन के निकट हुए इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कुछ अन्य दलों के नेता शामिल हुए। उन्होंने एक बड़ा बैनर ले रखा था, जिस पर 'इंडिया नीड्स लीडरशिप, नॉट साइलेंस' (भारत को नेतृत्व की जरूरत है, चुप्पी की नहीं)' लिखा हुआ था। विपक्षी सांसदों ने 'अमेरिका के सामने सरेंडर करना बंद करो' जैसे नारे लगाए। विपक्ष की मांग है कि संसद में पश्चिम एशिया संकट पर अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए।
एक वर्तमान सदस्य और चार पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि देने के बाद लोकसभा की बैठक 12 बजे तक स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही सोमवार को दिवंगत सांसद रिकी एंड्रयू जे सिंगकॉन और चार पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पहले दिन की कार्यवाही शुरू करते हुए पीठासीन सभापति एन के प्रेमचंद्रन ने एक वर्तमान सदस्य और चार पूर्व सदस्यों के निधन की जानकारी सदन को दी।
दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। मेघालय के शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एंड्रयू जे सिंगकॉन का निधन गत 19 फरवरी को हो गया। वह 54 वर्ष के थे।
दसवीं और 11वीं लोकसभा में ओडिशा की मयूरभंज सीट से सदस्य रहीं कुमारी सुशीला तिरिया का निधन गत एक फरवरी को भुवनेश्वर में हो गया। वह 69 वर्ष की थीं। उत्तर प्रदेश के उन्नाव संसदीय क्षेत्र से दसवीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा के सदस्य रहे देवी बक्स सिंह का निधन नौ फरवरी को कानपुर में हो गया। वह 85 वर्ष के थे।
बिहार के गोपालगंज संसदीय क्षेत्र से 15वीं लोकसभा के सदस्य रहे पूर्णमासी राम का निधन गत 25 फरवरी को पटना में हो गया। वह 76 वर्ष के थे। केरल की वडकरा लोकसभा से छह बार निचले सदन के सदस्य रहे केपी उन्नीकृष्णन का निधन गत तीन मार्च को हुआ। वह 89 वर्ष के थे।
लोकसभा में प्रश्नकाल की शुरुआत सामान्यत: अध्यक्ष करते हैं। लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला उन्हें हटाने के लिए विपक्ष द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद से बजट सत्र के पहले चरण के अंतिम कुछ दिन से कार्यवाही संचालित नहीं कर रहे हैं। लोकसभा आज विपक्षी सदस्यों के नोटिस पर विचार करेगी।
बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के तीन सदस्य- मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि सदन की अनुमति मांगेगे। कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन मिलने के बाद वे यह प्रस्ताव सदन में चर्चा और मतदान के लिए रखेंगे।
संविधान के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वह कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। बिरला संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं, हालांकि नियम इस बारे में स्पष्ट नहीं हैं।

