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संसद ने दी प्रश्नपत्र लीक निरोधक विधेयक को मंजूरी, 10 साल तक की सजा का प्रावधान

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया

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सांकेतिक चित्र
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राज्यसभा ने आज 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई, जिसमें प्रश्न पत्र लीक करने के अपराध में दस साल तक की सजा तथा 50 लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

नीट प्रश्नपत्र लीक की पृष्ठभूमि में लाए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को लोकसभा ने एक दिन पहले ही मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। सदन ने विपक्ष द्वारा विधेयक पर लाए गए संशोधन प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

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मंत्री के जवाब के पहले कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए सदन से वाक आउट किया। वाक आउट पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष पूरी तरह से मुद्दाविहीन हो गया है और उसने अपनी करतूत से इसे साबित भी कर दिया है। चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ पेपर लीक से नहीं जुड़ा हुआ है बल्कि परीक्षा में कदाचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

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उन्होंने अपने जवाब में विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि उसने चर्चा में विपक्ष शासित राज्यों में हुए पेपर लीक का जिक्र नहीं किया। उन्होंने शिक्षा में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा को वहनीय बनाने पर जोर दिया और ''मैनेजमेंट कोटा'' को खत्म किया। सरकार ने सीटों में वृद्धि करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने न सिर्फ मेडिकल शिक्षा में बल्कि उच्च शिक्षा पर जोर दिया है और विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कारावास और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रस्ताव

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों के अनुसार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। इसी तरह संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।

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