अभिभावकों, विद्यार्थियों ने 12वीं के मूल्यांकन फार्मूले पर जताई चिंता; सुप्रीमकोर्ट ने सीबीएसई, सीआईएससीई से मांगा जवाब

अभिभावकों, विद्यार्थियों ने 12वीं के मूल्यांकन फार्मूले पर जताई चिंता; सुप्रीमकोर्ट ने सीबीएसई, सीआईएससीई से मांगा जवाब

नयी दिल्ली, 21 जून (एजेंसी)सुप्रीमकोर्ट ने सीबीएसई और आईसीएसई को सोमवार को निर्देश दिया कि वे 12वीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के लिए तैयार किए गए फार्मूले पर कुछ छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई चिंताओं को लेकर जवाब दें। 12वीं कक्षा की परीक्षाएं कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण रद्द कर दी गई हैं। अभिभावकों के एक संघ और छात्रों ने 12वीं कक्षा के परिणामों के लिए मूल्यांकन संबंधी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और भारतीय माध्यमिक शिक्षा प्रमाण पत्र (आईसीएसई) की योजनाओं पर चिंता व्यक्त हुए कहा है कि इसके कई उपनियम मनमाने हैं और वे छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की विशेष पीठ ने कहा कि वह हस्तक्षेप करने वालों की चिंताओं पर सीबीएसई और आईसीएसई के वकीलों के जवाब पर मंगलवार को सुनवाई करेगी। पीठ ने रजिस्ट्री को इस मामले में उन सभी लंबित याचिकाओं को मंगलवार, 22 जून को सूचीबद्ध करने का भी निर्देश दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने 12वीं कक्षा की परीक्षा रद्द करने के सीबीएसई के फैसले को चुनौती दी है और दोनों बोर्डों की मूल्यांकन योजनाओं पर चिंता जताई है।

उत्तर प्रदेश अभिभावक संघ, लखनऊ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने शुरुआत में कहा कि सीबीएसई की योजना में छात्रों को दिया गया बाह्य परीक्षा का विकल्प उन छात्रों के लिए अहम होगा जो आंतरिक मूल्यांकन में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके। वकील ने कहा, “छात्र और स्कूल दोनों को बाहरी परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन का विकल्प चुनने का अवसर प्रारंभिक चरण में ही दिया जाना चाहिए। यदि कोई स्कूल या छात्र इस आंतरिक मूल्यांकन का विकल्प नहीं चुनना चाहता, तो जुलाई के मध्य में बाह्य परीक्षा के लिए एक तारीख तय की जा सकती है या परीक्षा आयोजित करने के लिए अनुकूल कोई भी तारीख तय की जा सकती है।''

पीठ ने कहा कि छात्रों के लिए आशा की कोई किरण होनी चाहिए और कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘परीक्षा रद्द करने का फैसला उच्चतम स्तर पर लिया गया है और हमने इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है।'' वकील ने कहा कि छात्रों के मूल्यांकन की योजना के संबंध में कई चिंताएं हैं, जिनसे अनिश्चितता बढ़ रही है और कोई नहीं जानता कि वास्तव में क्या होगा। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन योजना में एकरूपता होनी चाहिए क्योंकि सीआईएससीई योजना में औसत अंकों की गणना के लिए अंग्रेजी अनिवार्य कर दी गई है, जबकि सीबीएसई में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है और सर्वाधिक अंक वाले तीन विषयों को शामिल किया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने बोर्ड द्वारा सुझाए गए मूल्यांकन फार्मूले के बारे में गणित के एक शिक्षक के साथ चर्चा की थी और शिक्षक ने कहा था कि यह बहुत जटिल है। पीठ ने कहा कि यदि वह फार्मूला नहीं समझ नहीं पा रहे हैं, तो वह गणित के किस तरह के शिक्षक हैं। पीठ ने आगे की सुनवाई के लिए मामले को मंगलवार दोपहर दो बजे के लिए सूचीबद्ध किया।

न्यायालय ने 17 जून को कहा था कि 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा को रद्द करने का फैसला वापस नहीं होगा और उसने इसके साथ ही सीआईएससीई और सीबीएसई की मूल्यांकन योजना को मंजूरी दे दी थी जिसमें 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के नतीजों के आधार पर क्रमश: 30:30:40 का फॉर्मूला अपनाया जाएगा। काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्ज़ामिनेशंस (सीआईएससीई) ने हालांकि कहा कि वह विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए पिछले 6 कक्षाओं के प्रदर्शन पर विचार कर रहा है जबकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 12वीं के विद्यार्थियों के अंतिम नतीजों को तैयार करने के लिए 10वीं, 11वीं अैर 12वीं कक्षा के प्रदर्शन को आधार बनाने का प्रस्ताव किया है। दोनों बोर्ड ने कहा कि वे 31 जुलाई या उससे पहले नतीजे घोषित करेंगे।

 

 

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