विपक्ष करेगा सत्र का बहिष्कार

विपक्ष करेगा सत्र का बहिष्कार

नयी दिल्ली में उपसभापति हरिवंश नारायण िसंह संसद भवन परिसर में रातभर धरना देेने वाले आठ िनलंबित सांसदों को मंगलवार सुबह चाय की पेशकश करते हुए। -प्रेट्र

हरीश लखेड़ा/ ट्रिन्यू

नयी दिल्ली, 22 सितंबर

कृषि संबंधी बिलों से पैदा हुए विवाद से सियासत गरमा गयी है। राज्यसभा के 8 सांसदों का निलंबन रद्द होने तक कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्षी दलों ने मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों की बैठकों का बहिष्कार करने की घोषणा की है। सरकार भी विपक्ष के दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है। सरकार ने दो टूक कह दिया है कि यदि ये 8 सांसद खेद प्रकट कर लेेते हैं तो निलंबन रद्द किया जा सकता है। हालांकि, ये सांसद माफी मांगने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। विपक्ष इस मामले को अब सड़कों पर ले जाने की तैयारी में है। वहीं, सरकार और एनडीए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के साथ हुए दुर्व्यवहार को मुद्दा बनाने में जुट

गये हैं।

रविवार को विपक्षी सांसदों का निशाना बने उपसभापति हरिवंश मंगलवार सुबह संसद भवन परिसर में धरना दे रहे 8 निलंबित सांसदों के लिए चाय लेकर गये। अपने निलंबन के खिलाफ रातभर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास डटे इन सांसदों ने सुबह करीब 11 बजे धरना समाप्त किया। इस बीच, हरिवंश ने रविवार की घटना को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर अपनी वेदना बताई। इसके साथ ही उन्होंने एक दिन का उपवास शुरू कर दिया। हरिवंश ने अपने पत्र में बिहार के लोकतंत्र से लेकर कर्पूरी ठाकुर, रामधारी सिंह दिनकर आदि का भी जिक्र किया। इससे इस मामले के अब बिहार की चुनावी जंग में भी तूल पकड़ने के आसार बन गए हैं।

इस बीच, संसद के मानसून सत्र में लोकसभा की कार्यवाही कोरोना वायरस को लेकर चिंताओं के बीच तय समय से 8 दिन पहले बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की जा सकती है।

कांग्रेस ने रखी 3 मांगें

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने निलंबित सांसदों का निलंबन वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस की 3 मांगें हैं। पहली यह कि सदन में एक और विधेयक लाया जाए या प्रधानमंत्री अथवा कृषि मंत्री सदन में बयान दें कि एमएसपी से कम खरीद को गैर कानूनी बनाया जाएगा। दूसरी यह कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एमएसपी का सी2 फार्मूला लागू हो। तीसरी यह कि राज्यों की एजेंसियां या एफसीआई भी खरीद करे तथा एमएसपी के हिसाब से खरीद हो। उन्होंने कहा इन मांगों के पूरा होने तक सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया जाएगा। कांग्रेस के साथ ही सपा, एनसीपी, डीएमके, टीएमसी, आप, वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी भी निलंबित 8 सांसदों का साथ दे रहे हैं। राज्यसभा में विपक्ष ने इन सांसदों का निलंबन रद्द करने की मांग पर हंगामा किया और मानसून सत्र के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। शाम को लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राज्यसभा और लोकसभा जुड़वा भाइयों की तरह हैं, यदि कोई दुख में होता है, तो दूसरे को संभालना पड़ता है। हमारा मुद्दा कृषि बिल से संबंधित है, यदि सरकार इसे वापस लेने को सहमत है तो हम सत्र जारी रख सकते हैं।

नायडू, मोदी ने की हरिवंश की प्रशंसा

राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने हरिवंश के पत्र का उल्लेख कर सांसदों को नसीहत दी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि जिन्होंने अपमान किया, उन्हें हरिवंश जी ने चाय पिलाई। मोदी ने कहा, हर किसी ने देखा कि दो दिन पहले उन पर हमला किया गया और फिर वही लोग उनके खिलाफ धरने पर भी बैठ गए, लेकिन आज हरिवंश ने उन्हीं लोगों को सवेरे-सवेरे अपने घर से चाय ले जाकर पिलाई। यह हरिवंश जी की उदारता और महानता को दर्शाता है। लोकतंत्र के लिए इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है। मोदी ने हरिवंश के लिखे 3 पन्नों के पत्र को ट्विटर पर साझा किया।

पत्र में बिहार की धरती का उल्लेख : हरिवंश ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में बिहार की धरती का खूब उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भी याद किया और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता भी लिखी। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती पर पैदा हुए राष्ट्रकवि दिनकर, दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे।

23 सितंबर को दिनकर की जन्मतिथि है, इसलिए 22 सितंबर सुबह से 23 सितंबर सुबह तक 24 घंटे का उपवास मैं कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि रविवार को जो कुछ हुआ, उससे पिछले 2 दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, आत्मतनाव और मानसिक वेदना में हूं। मैं पूरी रात सो नहीं पाया। जेपी के गांव में पैदा हुआ, गांधी, जेपी, लोहिया और कर्पूरी ठाकुर जैसे लोगों के सार्वजनिक जीवन ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। सदन के माननीय सदस्यों द्वारा लोकतंत्र के नाम पर हिंसक व्यवहार हुआ। आसन पर बैठे व्यक्ति को भयभीत करने की कोशिश हुई। उच्च सदन की हर मर्यादा और व्यवस्था की धज्जियां उड़ायी गयीं। सदन में सदस्यों ने नियम पुस्तिका फाड़ी। मेरे ऊपर फेंका। भद्दे और असंसदीय नारे लगाये गये। हृदय और मन को बेचैन करने वाला लोकतंत्र के चीरहरण का दृश्य पूरी रात मेरे मस्तिष्क में छाया रहा। स्वभावत: अंतर्मुखी हूं। गांव का आदमी हूं। मुझे साहित्य, संवेदना और मूल्यों ने गढ़ा है।

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