सिविल सेवा परीक्षा स्थगित करने की याचिका पर सुप्रीमकोर्ट का केन्द्र और यूपीएससी को नोटिस

सिविल सेवा परीक्षा स्थगित करने की याचिका पर सुप्रीमकोर्ट का केन्द्र और यूपीएससी को नोटिस

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (एजेंसी) 

देश में कोविड-19 महामारी और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर सिविल सेवा परीक्षा स्थगित करने के लिये दायर याचिका पर सुप्रीमकोर्ट ने बृहस्पतिवार को केन्द्र और यूपीएससी को नोटिस जारी किये। जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने इस संबंध में याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद केन्द्र और यूपीएससी को नोटिस जारी किये। पीठ ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिये 28 सितंबर को सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ताओं ने सिविल सेवा परीक्षा परीक्षा को दो से तीन महीने के लिये स्थगित करने का अनुरोध किया है ताकि उस समय तक बाढ़ और लगातार बारिश की स्थिति में सुधार हो जायेगा और कोविड-19 संक्रमण भी कम हो जायेगा। यह याचिका वासीरेड्डी गोवर्धन साई प्रकाश और अन्य ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा परिवर्तित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा कराने का निर्णय याचिकाकर्ताओं और उनकी ही तरह के दूसरे व्यक्तियों को जनता की सेवा करने के लिये अपना पेशा चुनने के बारे में संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(जी) में प्रदत्त मौलिक अधिकार का हनन करता है। यह याचिका यूपीएससी की सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा चार अक्टूबर को आयोजित करने के खिलाफ 20 अभ्यर्थियों ने दायर की है। याचिका के अनुसार 7 घंटे की ऑफलाइन परीक्षा में देश के 72 शहरों में बने परीक्षा केन्द्रों में करीब 6 लाख अभ्यर्थी हिस्सा लेंगे। याचिका के अनुसार सिविल सेवाओं में भर्ती के लिये आयोजित होने वाली यह परीक्षा शैक्षणिक परीक्षा से भिन्न है और अगर इसे कुछ समय के लिये स्थगित किया जाता है तो इससे किसी प्रकार के शैक्षणिक सत्र में विलंब होने जैसा सवाल नहीं उठता है।

 

 

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