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NEET-UG 2026: लाखों छात्रों का भविष्य अधर में, नीट-यूजी पर CBI की FIR

NEET-UG 2026: जांच एजेंसी जल्द ही राजस्थान में एक टीम भेजेगी

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने तीन मई को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्र कथित तौर पर लीक होने के सिलसिले में मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी  मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी-2026' को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के मद्देनजर मंगलवार को रद्द करने की घोषणा की तथा सरकार ने सीबीआई को इन 'अनियमितताओं' की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया।

केंद्र से निर्देश मिलने के बाद सीबीआई ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों में मामला दर्ज किया। जांच एजेंसी जल्द ही राजस्थान में एक टीम भेजेगी, ताकि राज्य पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) से सामग्री एकत्र की जा सके, जो इस मामले की जांच कर रहा था। सीबीआई ने इससे पहले 2024 के नीट परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले को सुलझाया था। नीट यूजी 2026 परीक्षा तीन मई को भारत के 551 शहरों और अन्य देशों के 14 शहरों में आयोजित की गई थी।

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यह परीक्षा लगभग 23 लाख पंजीकृत परीक्षार्थियों के लिए आयोजित की गई थी। एनटीए के अनुसार, परीक्षा के चार दिन बाद सात मई की शाम को कथित अनियमितताओं से संबंधित सूचनाएं प्राप्त हुईं और आठ मई की सुबह ''स्वतंत्र सत्यापन व आवश्यक कार्रवाई'' के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेज दी गईं। केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एनटीए द्वारा तथ्यों को परखे जाने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने तीन मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को भारत सरकार की मंजूरी से रद्द करने और अलग से अधिसूचित तिथियों पर परीक्षा पुनः आयोजित करने का निर्णय लिया है।

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राजस्थान पुलिस के एसओजी ने दावा किया था कि परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को कथित तौर पर दिए गए रसायन विज्ञान के एक ''गेस प्रश्नपत्र'' में लगभग 410 प्रश्न थे, जिनमें से लगभग 120 प्रश्न परीक्षा में आए थे। परीक्षा में हालांकि रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र में 45 प्रश्न थे, लेकिन परीक्षा में प्रश्नपत्रों के चार सेट का इस्तेमाल किया गया था। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने कहा था कि बताया जा रहा है कि यह गेस प्रश्नपत्र छात्रों के बीच काफी पहले से ही वितरित किया गया था; यह वास्तविक परीक्षा से 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक उन तक पहुंचना शुरू हो गया था। हम 'गेस प्रश्नपत्र' के आधार पर जांच कर रहे हैं और यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।''

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