MP Rajya Sabha Elections: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस ने 'सीट चोरी' दिया करार; धरने पर बैठे
दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है।
उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंगलवार को मध्य प्रदेश से पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ निर्वाचन आयोग के मुख्यालय पहुंचे और अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने पर मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश और सचिन पायलट तथा कुछ अन्य नेता आयोग के मुख्यालय पहुंचे। कांग्रेस का आरोप है कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज किया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है।
हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे: वेणुगोपाल
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है। उनके नामांकन में किसी भी त्रुटि या कोई जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण है और कांग्रेस से एक सीट छीनने का हताशापूर्ण प्रयास है। जब उन्हें (भाजपा को) एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका (मीनाक्षी नटराजन का) नामांकन खारिज करवा दिया।
वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह संविधान और लोकतंत्र के प्रति भाजपा की खोखली प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वह हर कदम पर किसी न किसी तरह "वोट चोरी" पर आमादा है। हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ कानूनी तथा सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।
दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है। इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को चुनाव होना है
निर्वाचन अधिकारी का यह फैसला ऐसे दिन आया जब 'क्रॉस वोटिंग' से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया था। दूसरे जत्थे को मंगलवार शाम को बेंगलुरु जाना था। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को चुनाव होना है।
सोमवार को नामांकन की आखिरी तारीख थी जबकि आज नामांकन पत्रों की जांच की गई।भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है, लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया। गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है।
राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि भाजपा ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। नटराजन ने इस आपराधिक मामले में अदालत में अपना जवाब भी दाखिल किया है, लेकिन शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया।उन्होंने कहा कि इस जानकारी को जानबूझकर छुपाया गया है। एससी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथ पत्र में आपको यह जानकारी देनी होती है।
