PM Modi-Putin Talk : मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात, 2030 तक भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की
PM Modi-Putin Talk : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक मुद्दों पर वार्ता की। इस वार्ता में मुख्य रूप से वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने तथा रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। पुतिन के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार सुबह नयी दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटे बाद दोनों नेताओं के बीच वार्ता हुई। वार्ता के बाद दोनों नेता 'भारत मंडपम' परिसर के भीतर एक ही कार में सवार होकर कारोबारी मंच के आयोजन स्थल पर पहुंचे।
समझा जाता है कि वार्ता के दौरान पुतिन ने मोदी को यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति और जारी शांति पहल के बारे में जानकारी दी। वहीं, मोदी ने संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने की भारत की स्थिति को दोहराया। मोदी और पुतिन इससे पहले अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे। उस समय प्रधानमंत्री ने संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया था और रूसी नेता से ''अंतहीन युद्ध से युद्ध की समाप्ति की ओर'' बढ़ने का आग्रह किया था। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, ऊर्जा तथा उर्वरक सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में जारी सहयोग पर भी चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार, वार्ता में व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के उपायों पर प्रमुखता से चर्चा हुई। भारत ने रूस में भारतीय निर्यातकों के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग रखी, ताकि बढ़ते व्यापार घाटे को कम किया जा सके। दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 65 अरब अमेरिकी डॉलर है।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने अपने पहले से मजबूत रक्षा सहयोग को और विस्तार देने के तौर-तरीकों पर भी चर्चा की। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नयन पर विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही मॉस्को अपनी शेष एस-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रस्तावित सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पर भी चर्चा कर रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध काफी मजबूत बने हुए हैं और दोनों पक्ष असैन्य परमाणु रिएक्टर क्षेत्र में सहयोग गहरा करने पर भी सहमत हुए हैं।

