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Mini Gun Factory : ऊपर डबल बेड, नीचे गुप्त तहखाना... फिल्मों जैसा सीन; मेरठ में पकड़ी गई अवैध गन फैक्ट्री

हथियारों की आपूर्ति अलग-अलग 'पार्टियों' को की जाती थी

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एआई फोटो।
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Mini Gun Factory : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के लोहियानगर इलाके में पेश आए एक चौंकाने वाले मामले में पुलिस ने एक सामान्य से दिखने वाले कमरे में रखे डबल बेड के अंदर बने तहखाने से एक छोटी गन फैक्ट्री का संचालन होने का भंडाफोड़ किया है।

अवैध रूप से पिस्टल का हो रहा था निर्माण 

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पुरानी फिल्मों में तस्वीर या खिड़की खिसकाकर खुलने वाले छुपे तहखानों की याद दिलाती इस घटना में एक डबल बेड के नीचे गुप्त तहखाना पाया गया, जहां अवैध रूप से पिस्टल का निर्माण हो रहा था। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर क्षेत्र) विनायक गोपाल भोसले बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि तहखाने के निर्माण की अनुमति कैसे मिली और किस तरह यहां अवैध फैक्ट्री संचालित की जा रही थी।

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बिना हटाए नीचे बने तहखाने का अंदाजा लगाना नामुमकिन

लोहियानगर थाना क्षेत्र में रविवार को स्वाट टीम, सर्विलांस सेल और स्थानीय पुलिस ने अल्लीपुर गांव में छापेमारी कर अवैध शस्त्र फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान 11 अभियुक्तों को गिरफ्तार करके मौके से आठ तैयार पिस्टल, तीन अधबनी पिस्टल, बड़ी संख्या में मैगजीन, बैरल और निर्माण उपकरण बरामद किए थे। डबल बेड के अंदर से नीचे तक बना तहखाना सिर्फ छुपने का ठिकाना नहीं, बल्कि पूरी तरह से संगठित 'मिनी फैक्ट्री' थी। डबल बेड को इस तरह डिजाइन किया था कि बिना हटाए नीचे बने तहखाने का अंदाजा लगाना नामुमकिन था।

यह पूरा ताम- झाम अस्थायी नहीं

बेड हटाते ही नीचे जाने का रास्ता खुलता था, जहां सीमित जगह में मशीनें, औजार, कच्चा माल और अधबने हथियार व्यवस्थित ढंग से रखे गए थे। मामले की जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह पूरा ताम- झाम अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय तक उत्पादन जारी रखने के लिए तैयार किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस मिनी फैक्ट्री में बने हथियारों की आपूर्ति अलग-अलग 'पार्टियों' को की जाती थी, जो गाड़ियों से आकर माल ले जाती थीं ताकि किसी को इस पूरे गोरखधंधे की भनक ना लग सके।

अवैध शस्त्र निर्माण के नए तौर-तरीके का संकेत

अधिकारियों का मानना है कि अगर यह तरीका किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ पाया जाता है, तो यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध शस्त्र निर्माण के एक नए तौर-तरीके का संकेत हो सकता है। इसी के मद्देनजर आसपास के जिलों को सतर्क किया गया है और इस तरह के छिपे ठिकानों की पहचान के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस फैक्ट्री में बने हथियारों का इस्तेमाल किन-किन आपराधिक घटनाओं में हुआ है या होने वाला था।

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