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Divorce Celebration : तलाक के बाद बेटी का ढोल-नगाड़ों से स्वागत, रिटायर्ड जज पिता ने पेश की नई मिसाल

समाज की पुरानी रूढ़ियों पर कड़ा प्रहार :  मेरठ फैमिली कोर्ट से 7 साल बाद मिली तलाक की मंजूरी; परिवार ने 'आई लव माय डॉटर' लिखी टी-शर्ट पहनकर मनाया नई शुरुआत का जश्न

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Divorce Celebration : समाज में आमतौर पर बेटी के तलाक और उसकी मायके वापसी को दुख या बदनामी का विषय माना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक सेवानिवृत्त जिला जज ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह से तोड़ते हुए एक नई मिसाल पेश की है। शनिवार को फैमिली कोर्ट से बेटी का तलाक मंजूर होने पर पिता ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उसका भव्य स्वागत किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने काले रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर 'आई लव माय डॉटर' लिखा था। कचहरी से लेकर घर तक नाचते-गाते परिजनों का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हो रहा है।

शादी के कुछ समय बाद ही शुरू हो गई थी प्रताड़ना

शास्त्री नगर निवासी रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर के रहने वाले आर्मी मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष का व्यवहार बदल गया। एक बेटा होने के बावजूद ससुराल में प्रणिता को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया। जब 7-8 साल तक हालात नहीं सुधरे, तो आखिरकार प्रणिता ने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को अदालत ने इस तलाक को कानूनी रूप से मंजूरी दे दी।

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ससुराल से नहीं लिया कोई सामान या एलीमनी

तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब प्रणिता कोर्ट से बाहर आईं, तो परिवार ने उनका बाजे-गाजे के साथ स्वागत किया और पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बांटी। डॉ. शर्मा ने कहा कि बेटी कोई सामान नहीं है, वह मेरे परिवार का अभिन्न हिस्सा और मेरा गौरव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ससुराल पक्ष से कोई एलीमनी (भत्ता) या सामान वापस नहीं लिया गया है। उन्होंने समाज को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जब बेटी की विदाई बाजे-गाजे के साथ हुई थी, तो उसकी वापसी भी उसी सम्मान के साथ होनी चाहिए।

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बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी

इस मौके पर प्रणिता ने भी महिलाओं से अपील की कि यदि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना का शिकार हैं, तो उन्हें चुप रहने के बजाय अपनी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों की शादी की जल्दी करने के बजाय पहले उन्हें शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। इस अनोखी पहल और पिता के साहस की शहर भर में जमकर सराहना हो रही है।

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