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MDU रोहतक में 304वीं कार्यकारी परिषद की बैठक राज्यपाल की रोक के बाद स्थगित

MDU Rohtak meeting controversy:  रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में प्रशासनिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति राजवीर सिंह द्वारा बुलाई गई 304वीं कार्यकारी परिषद (Executive Council) की बैठक पर राज्यपाल कार्यालय ने सख्त आपत्ति...

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MDU Rohtak meeting controversy:  रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में प्रशासनिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति राजवीर सिंह द्वारा बुलाई गई 304वीं कार्यकारी परिषद (Executive Council) की बैठक पर राज्यपाल कार्यालय ने सख्त आपत्ति जताते हुए इसे अगले आदेश तक स्थगित करने के निर्देश दिए हैं। आदेशों के बाद वीसी ने बैठक स्थगित कर दी।

राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 18 फरवरी को प्रस्तावित 304वीं कार्यकारिणी बैठक, दिनांक 17.02.2026 के पत्र के माध्यम से जारी सरकारी निर्देशों का उल्लंघन है। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्यपाल (कुलाधिपति) ने बैठक को स्थगित करने का आदेश दिया है।

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इन आदेशों के बाद कार्यकारी परिषद (Executive Council) की आज निर्धारित बैठक स्थगित कर दी गई है। विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियमों के अनुरूप आयोजित की जा रही कार्यकारी परिषद की 304वीं बैठक आज विश्वविद्यालय सचिवालय स्थित कुलपति समिति कक्ष में आहूत की गई थी। बता दें, बैठक शुरू हो चुकी थी, लेकिन इसी बीच राज्यपाल का आदेश आ गया, जिसके बाद बैठक को स्थगित कर दिया गया। यह जानकारी निदेशक जनसंपर्क प्रो. आशीष दहिया ने दी।

वहीं, इससे पूर्व वीसी प्रोफेसर राजवीर सिंह जब बैठक के लिए पहुंचे तो शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। शिक्षकों के एक गुट ने वीसी मुर्दाबाद के नारे लगाए और बैठक को स्थगित करने की मांग की। वहीं, गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रधान कार्यकारी परिषद की बैठक के समर्थन में नारे लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हित में यह बैठक बहुत जरूरी है।

यह भी पढ़ें: सरकार के पत्र के बाद MDU रोहतक में हलचल, कुलपति-कुलसचिव आमने-सामने

एक अन्य आदेश (क्रमांक एचएलबी-जीएस-2026/1393) में राज्यपाल-कुलाधिपति ने रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकांत के निलंबन आदेश (दिनांक 17.02.2026) को रद्द करते हुए उन्हें तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि कुलपति द्वारा भविष्य में कोई भी कार्रवाई कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं की जाएगी।

इस घटनाक्रम से पहले कुलपति प्रो. राजवीर सिंह ने हरियाणा सरकार के सख्त पत्र के बावजूद अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए कुलसचिव कृष्णकांत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। उनकी जगह फार्मेसी विभाग के प्रो. हरीश दुरेजा को नया कुलसचिव नियुक्त किया गया, ताकि 304वीं कार्यकारी परिषद की बैठक आयोजित की जा सके।

सरकार के निर्देशों के तहत कुलसचिव की ओर से बैठक स्थगित करने संबंधी ईमेल भेजी गई थी। इस पर कुलपति ने आपत्ति जताते हुए सभी सदस्यों को बैठक में शामिल होने के निर्देश जारी किए। कुलपति का पक्ष है कि प्रशासनिक कार्य बाधित नहीं होने चाहिए और बैठक नियत समय पर होना आवश्यक था।

दूसरी ओर, डॉ. कृष्णकांत ने अपने निलंबन को पूरी तरह अवैध बताया है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति राज्यपाल (कुलाधिपति) की मंजूरी से हुई है, ऐसे में कुलपति को उन्हें निलंबित करने का अधिकार नहीं है।

शिक्षक, कर्मचारी और छात्र भी दोफाड़

बैठक को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में भी मतभेद सामने आ रहे हैं। शिक्षक संघ, गैर-शिक्षक कर्मचारी संगठन और छात्र समूह दो खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ वर्ग बैठक के समर्थन में थे, जबकि अन्य कुलपति द्वारा बुलाई गई बैठक पर आपत्ति जता रहे थे।

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