AAP MPs Defection : सांसदों के दलबदल पर राष्ट्रपति मुर्मू से मिले सीएम मान, बताया 'लोकतंत्र की हत्या'
भाजपा में विलय को बताया असंवैधानिक, केंद्र पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और सरकारें अस्थिर करने का लगाया आरोप
AAP MPs Defection : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को 'संवैधानिक उल्लंघन' और 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया।
मुलाकात के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए भगवंत मान ने कहा कि हाल ही में 'आप' के सात राज्यसभा सदस्यों का भाजपा में जाना संविधान की भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि शिष्टमंडल ने इन सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की है। मान के अनुसार, इन सांसदों ने भाजपा में विलय से पहले खुद को एक 'अलग दल' के रूप में पेश करने का जो दावा किया है, वह पूरी तरह निराधार और असंवैधानिक है।
'पंजाब कोई ट्रक नहीं, जिसे जब चाहे मोड़ दें'
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं के उन बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब को अगला राजनीतिक लक्ष्य बताया जा रहा था। मान ने दो-टूक शब्दों में कहा, "पंजाब कोई ट्रक नहीं है कि कोई भी आए और इसे अपनी मर्जी से चलाने लगे। यह वह राज्य है जिसने देश की अस्मिता पर आंच आने पर हमेशा सबसे पहले कुर्बानी दी है।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार पंजाब में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने की कोशिश करेगी, तो उसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। मान ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा के पास वर्तमान में पंजाब में केवल दो विधायक हैं और अगले चुनाव में यह संख्या शून्य तक पहुंच सकती है।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का लगाया आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में भगवंत मान ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर पार्टियों को तोड़ रही है और चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन लोटस' की रणनीतियां पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी।
मान ने कहा, "हमारे विधायक करोड़ों पंजाबियों की उम्मीदों और भरोसे का प्रतीक हैं। पंजाब के लोग गद्दारी कभी बर्दाश्त नहीं करते। हम अपने संवैधानिक मूल्यों और जनता के जनादेश की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे।"
क्या है दलबदल का विवाद ?
उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा था जब उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी। इनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं, जिन्होंने भाजपा में विलय कर लिया। इनमें से छह सांसद पंजाब से हैं। इन सांसदों ने पार्टी छोड़ने के पीछे 'आप' के मूल सिद्धांतों से भटकाव का हवाला दिया था। मुख्यमंत्री अब इसी विलय को चुनौती देते हुए इसकी वैधानिकता पर सवाल उठा रहे हैं।

