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US Pacific Command: मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले बड़ा फैसला, अमेरिका ने हिंद-प्रशांत कमान से हटाया ‘इंडो’ शब्द

US Pacific Command: ट्रंप प्रशासन ने 2018 में किया था नाम परिवर्तन, पेंटागन बोला- ऐतिहासिक विरासत और सैन्य परंपरा का सम्मान करने के लिए लिया गया फैसला

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अमेरिकी रक्षा विभाग ने मंगलवार को घोषणा की कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (US Indo-Pacom) आधिकारिक तौर पर अपने पुराने नाम—US पैसिफिक कमांड (US Pacom)—पर वापस लौट जाएगा। इमेज क्रेडिट/ANI
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US Pacific Command: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने से पहले डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हिंद प्रशांत कमान (INDOPACOM) से इंडो शब्द हटाते हुए अमेरिकी प्रशांत कमान (USPACOM) कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला कमान की ऐतिहासिक विरासत और दशकों पुरानी सैन्य परंपराओं का सम्मान करने के उद्देश्य से लिया गया है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कमान एक जनवरी 1947 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा स्थापित की गई थी और 70 वर्षों से अधिक समय तक अमेरिकी प्रशांत कमान (USPACOM) के नाम से कार्य करती रही। इसे अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी एकीकृत लड़ाकू कमानों में गिना जाता है।

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2018 में बदला गया था नाम

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने अमेरिकी प्रशांत कमान का नाम बदलकर अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान (INDOPACOM) कर दिया था। उस समय मैटिस ने कहा था कि हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक था।

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उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा था कि यह कमान "बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक" फैले विशाल क्षेत्र को कवर करती है।

ऐतिहासिक पहचान को बहाल करने का दावा

पेंटागन ने अपने बयान में कहा कि पुराने नाम की बहाली कमान की गहरी ऐतिहासिक जड़ों को सम्मान देने और प्रशांत क्षेत्र में सेवा देने वाले सैन्य कर्मियों के बीच गर्व तथा सामूहिक पहचान की भावना को मजबूत करने का प्रयास है।

मंत्रालय ने कहा कि यूएसपीएकॉम नाम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के निर्माण, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और विभिन्न मानवीय अभियानों में निभाई गई भूमिका का प्रतीक है।

भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है कार्यक्षेत्र

अमेरिकी प्रशांत कमान का कार्यक्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। यह दुनिया के सबसे बड़े सामरिक क्षेत्रों में से एक की सुरक्षा और सैन्य समन्वय की जिम्मेदारी संभालती है।

रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नाम बदलने के बावजूद कमान के मूल मिशन, रणनीतिक उद्देश्यों और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर मुक्त एवं खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कमान पहले की तरह ही अपने सहयोगी देशों और साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करती रहेगी। (एजेंसी के इनपुट के साथ)

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