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महर्षि दयानंद विवि में महिला कर्मियों से मासिक धर्म के मांगे सबूत!

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा से किया जवाब तलब

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सुप्रीम कोर्ट।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर केंद्र, हरियाणा सरकार और अन्य से जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में महिला सफाई कर्मचारियों को अपने निजी अंगों की तस्वीरें दिखाकर यह साबित करने के लिए कहा गया था कि उन्हें मासिक धर्म हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, ‘यह लोगों की मानसिकता को दर्शाता है। यदि उनकी अनुपस्थिति के कारण कोई भारी काम नहीं किया जा सका, तो किसी और को तैनात किया जा सकता था। हमें उम्मीद है कि इस याचिका से कुछ अच्छा होगा।’

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि यह एक गंभीर आपराधिक मामला है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की गयी है।

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याचिका में कथित घटना की विस्तृत जांच करने के लिए केंद्र और हरियाणा को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। बार निकाय ने यह सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश भी मांगे हैं कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य, सम्मान, निजता के अधिकार का उल्लंघन न हो।

26 अक्तूबर की घटना : हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष के विश्वविद्यालय परिसर का दौरा करने से कुछ घंटे पहले 26 अक्तूबर को यह कथित घटना हुई। पुलिस ने कहा है कि एमडीयू से जुड़े तीन लोगों पर 31 अक्तूबर को यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया था। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा था कि उसने हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के माध्यम से अनुबंध पर नियुक्त दो पर्यवेक्षकों को निलंबित कर दिया है और घटना की आंतरिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

यह है आराेप तीन महिला सफाई कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि अस्वस्थ होने की जानकारी देने के बावजूद दो पर्यवेक्षकों ने पहले उन्हें परिसर में सफाई करने के लिए मजबूर किया और फिर उनसे यह साबित करने के लिए कहा कि वे मासिक धर्म से गुजर रही हैं। एमडीयू में 11 वर्षों से नौकरी करने का दावा करने वाली एक सफाई कर्मचारी ने आरोप लगाया, ‘हमने उनसे कहा कि हम तेजी से काम नहीं कर सकते, क्योंकि हम मासिक धर्म के कारण अस्वस्थ हैं, लेकिन उन्होंने इसे साबित करने के लिए हमसे अपने निजी अंगों की तस्वीरें दिखाने को कहा। जब हमने इनकार कर दिया, तो हमारे साथ दुर्व्यवहार किया गया और बर्खास्त करने की धमकी दी गई।’ महिलाओं ने आरोप लगाया कि पर्यवेक्षकों ने उनसे कहा कि वे सहायक रजिस्ट्रार श्याम सुंदर के आदेशों का पालन कर रहे हैं। श्याम सुंदर ने पर्यवेक्षकों को ऐसा कोई निर्देश देने से इनकार किया है।

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