किसानों की तरह, जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी ‘बलिदान' देना होगा : फारूक अब्दुल्ला

नेशनल कांफ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला की जयंती पर बोले पूर्व सीएम

किसानों की तरह, जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी ‘बलिदान' देना होगा : फारूक अब्दुल्ला

श्रीनगर, 5 दिसंबर (एजेंसी)

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि जैसे नए कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों ने ‘बलिदान' दिया उसी तरह अपने राज्य और विशेष दर्जे को बहाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी ‘बलिदान' करना पड़ सकता है। पार्टी के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 116वीं जयंती के अवसर पर यहां नसीमबाग में उनके मकबरे पर नेकां की युवा शाखा के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र को तीन कृषि बिलों को रद्द करना पड़ा जब किसानों ने बलिदान दिया। हमें अपने अधिकार वापस पाने के लिए वैसा बलिदान भी करना पड़ सकता है। 'यह याद रखें, हमने (अनुच्छेद) 370, 35-ए और राज्य का दर्जा वापस पाने का वादा किया है और हम कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार हैं।' नेकां हालांकि भाईचारे के खिलाफ नहीं है और हिंसा का समर्थन नहीं करती है। केंद्र ने तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था और पांच अगस्त, 2019 को इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन में वृद्धि होने संबंधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि जब केंद्र शासित प्रदेश की बात आती है तो जैसे पर्यटन ही सब कुछ है। आपने 50,000 नौकरियों का वादा किया था, वे कहां हैं? बल्कि आप हमारे लोगों की नौकरियां समाप्त कर रहे हैं…।

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