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Legislative Council Elections : एडीए ने उतारे सभी 9 उम्मीदवार, पवन सिंह से लेकर निशांत कुमार ने दाखिल किया नामांकन

विधान परिषद चुनाव: पवन सिंह, निशांत कुमार समेत राजग के नौ उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन

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Legislative Council Elections : बिहार विधानपरिषद की नौ सीट के द्विवार्षिक चुनाव के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी नौ उम्मीदवारों ने सोमवार को अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। उनमें भोजपुरी फिल्म अभिनेता पवन सिंह, राज्य मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख शामिल हैं। बिहार की 75 सदस्यीय विधानपरिषद की नौ सीट पर द्विवार्षिक चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से आठ सीट पर राजग उम्मीदवार मैदान में हैं।

भाजपा समर्थित विधान परिषद उम्मीदवार पवन सिंह की एक झलक पाने के लिए विधानसभा परिसर में बड़ी संख्या में समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी। भाजपा ने पूर्व के राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए उन्हें विधान परिषद भेजने का फैसला किया है। वर्ष 2024 में पवन सिंह ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल लोकसभा क्षेत्र से भाजपा का टिकट लेने से इनकार कर दिया था और बाद में बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। माना जाता है कि उनके इस कदम से शाहाबाद क्षेत्र में राजग को नुकसान हुआ था और गठबंधन को कई सीट 'इंडिया' गठबंधन के हाथों गंवानी पड़ी थीं।

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पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव से पहले पवन सिंह भाजपा में लौट आए थे। उस समय उन्होंने कहा था कि वह ''पार्टी के सच्चे सिपाही'' बने रहना चाहते हैं और चुनावी टिकट की अपेक्षा से पार्टी में वापसी नहीं कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और राज्य सरकार में मंत्री निशांत कुमार नामांकन दाखिल करने के दौरान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा तथा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के साथ मौजूद थे। हालांकि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार इस अवसर पर उपस्थित नहीं थे। पार्टी नेताओं के अनुसार वह रोहतास जिले में अपने एक पुराने मित्र से मिलने गए हुए थे।

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान भी विधानसभा सचिवालय पहुंचे। चौधरी अप्रैल में बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। भाजपा ने पवन सिंह और लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरे संजय मयूख के अलावा अनिल ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है। अनिल ठाकुर और शीला पंडित पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता रहे हैं और प्रदेश इकाई में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं। जहां पवन सिंह और संजय मयूख सवर्ण समुदाय से आते हैं, वहीं अनिल ठाकुर और शीला पंडित अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) से हैं। भाजपा हाल के वर्षों में इस वर्ग के बीच अपने जनाधार को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

जदयू ने निशांत कुमार के अलावा पार्टी की प्रवक्ता रह चुकीं ईबीसी नेता भारती मेहता तथा पूर्व प्रदेश महासचिव एवं ओबीसी नेता शिवरानी देवी प्रजापति को उम्मीदवार बनाया है। जदयू के एक अन्य उम्मीदवार ललन प्रसाद ने विधानपरिषद की उस सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, जो जदयू के एक सदस्य के राज्यसभा सांसद बनने के बाद रिक्त हुई थी। इस बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवार और पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान के करीबी सहयोगी अशरफ अंसारी ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मौके पर मौजूद पार्टी के संसदीय बोर्ड अध्यक्ष और चिराग पासवान के बहनोई अरुण भारती ने कहा, ''हमारे नेता ने अपने पिता के सिद्धांतों का पालन किया है। रामविलास पासवान ने कभी बिहार में किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया था।''

उन्होंने दिवंगत रामविलास पासवान के उस रुख का उल्लेख किया, जब उन्होंने 2005 के गुजरात दंगों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। बाद में 2008 में बिहार विधानसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु स्थिति बनने पर रामविलास पासवान ने अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में समर्थन देने की बात कही थी। विधानपरिषद की जिन नौ सीट पर द्विवार्षिक चुनाव हो रहा है, उनमें से एक सीट पर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून है, जबकि मतदान 18 जून को होगा।

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