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जबरन वसूली मामले में लॉरेंस बिश्नोई समेत 3 आरोपमुक्त, सबूत पेश करने में विफल अभियोजन पक्ष

अभियोजन पक्ष अपराध को साबित करने के लिए सबूत पेश करने में विफल रहा

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लारेंस बिश्नोई की फाइल फोटो।
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दिल्ली की एक अदालत ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य को आरोपमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध को साबित करने के लिए सबूत पेश करने में विफल रहा।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूपुर गुप्ता ने रमन दीप सिंह की शिकायत पर सनलाइट कॉलोनी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 387 (जबरन वसूली के प्रयास में किसी व्यक्ति को मौत या गंभीर चोट का भय दिखाना) के तहत दर्ज एक मामले में लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरपदाड़िया और आशीष शर्मा को आरोपमुक्त कर दिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 23 और 24 अप्रैल 2023 की मध्यरात्रि के बीच उसे एक अज्ञात नंबर से फोन आने लगे, जिनमें उसे जान से मारने धमकी दी गई और उससे एक करोड़ रुपये की मांग की गई।

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जांच के बाद, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 386 (किसी व्यक्ति को जान से मारने या गंभीर चोट पहुंचाने की धमकी देकर जबरन वसूली करना) और धारा 387 के साथ धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। हालांकि, अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 386 के तहत जबरन वसूली के अपराध के लिए मृत्यु या गंभीर चोट के भय को लेकर संपत्ति की वास्तविक सुपुर्दगी आवश्यक है, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

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अदालत ने 20 फरवरी के अपने आदेश में कहा कि न तो शिकायतकर्ता ने धमकी के तहत संपत्ति की सुपुर्दगी का आरोप लगाया है और न ही पूरे आरोप पत्र में इसका उल्लेख किया गया है। आईपीसी की धारा 387 के तहत अपराध के लिए भी अभियोजन पक्ष कोई ऐसा ''स्पष्ट कृत्य'' साबित करने में विफल रहा, जिससे यह संकेत मिले कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को मौत या गंभीर चोट का भय पैदा किया था।

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