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आखिरी बार वीडियो कॉल पर देखा था... बादल फटा और SSB जवान से छीन गया पूरा परिवार, चसोटी त्रासदी की दर्दनाक कहानी

चसोटी में आई तबाही की भयावह याद, जवान ने खोई पत्नी, बच्चों समेत 9 करीबी

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सांकेतिक चित्र
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Chositi Cloudburst @1 Year : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मचैल माता मंदिर की तलहटी में स्थित चसोती में हुई बादल फटने की भयानक घटना और अचानक आई बाढ़ के एक साल बाद भी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के मुख्य आरक्षक हुसन दास को अपने करीबी रिश्तेदारों—पत्नी, दो बच्चों, मां, बहन, दो भतीजों और भाभी—को खोने का ऐसा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। दास के लिए, यह त्रासदी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि कुछ ही घंटों में बर्बाद हुई जिंदगी को फिर से खड़ा करने का रोज का संघर्ष है। जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर के बेनागढ़ गांव में उनका घर अब वीरान और ज्यादातर समय बंद रहता है – जो उस परिवार की दर्दनाक याद दिलाता है जिसे उन्होंने खो दिया।

घटना के समय बिहार में तैनात दास ने आखिरी बार अपने बच्चों को 14 अगस्त 2005 को वीडियो कॉल पर देखा था, जब परिवार मचैल माता के मंदिर में दर्शन करके लौट रहा था। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह छोटी-सी वीडियो कॉल ही उनके बच्चों की आखिरी झलक साबित होगी। दास ने बताया, "उस मनहूस दिन की सुबह मेरी अपने बच्चों से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वे तीर्थ-स्थल पर मत्था टेककर लौट रहे थे।" दास जब यह बात कह रहे थे आवाज और आंखों से साफ जाहिर था कि वह आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रहे हैं जो उस मजबूती को दर्शाता था जो बरसों के कड़े प्रशिक्षण से आती है। कुछ घंटों बाद, दोपहर करीब 12.25 बजे, मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पड़ने वाले मोटर से जाने योग्य आखिरी गांव 'चसोटी' में बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई।

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पानी का तेज बहाव अचानक बस्ती में घुस आया और उसने एक अस्थायी बाजार, तीर्थयात्रियों के लिए लंगर और एक सुरक्षा चौकी को नष्ट कर दिया, जिससे चारों ओर मौत और तबाही का मंजर पसर गया। दास ने बताया कि वीडियो कॉल के बाद वह सुबह करीब नौ बजे ड्यूटी पर चले गए थे। और तीन घंटे से ज्यादा समय बाद, उन्हें इस दुखद घटना के बारे में पता चला। उन्होंने कहा, "मैंने अपने परिवार से संपर्क करने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनके फोन बंद थे।" उन्होंने आगे कहा कि उसके बाद छाई खामोशी ही पिछले साल की सबसे बड़ी पहचान बन गई। दास का परिवार 12 अगस्त को मचैल माता की यात्रा पर गया था। इनमें उनकी पत्नी ममता रानी, बेटी अनांसी मेहरा, बेटा अर्शिल और मां जीतो देवी थीं। उनके साथ उनकी बहन जिन्नी देवी, बहन का बेटा ऋतिक मेहरा और बेटी पीहू और भाभी राही मेहरा भी थीं।

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उन्होंने कहा कि वे मेरा परिवार थे। सिर्फ मेरी पत्नी का शव ही मिल पाया, जबकि बाकी लोगों का कोई पता नहीं चल सका है। सशस्त्र सीमा बल पीछे नहीं हटा। उन्होंने कहा, "मेरी यूनिट आगे आई और लापता लोगों की तलाश में शामिल हुई, लेकिन वे नहीं मिल सके। तलाशी दलों ने प्रभावित इलाके में एक महीने से ज़्यादा समय तक छानबीन की, लेकिन लापता लोगों को आखिरी विदाई नहीं मिल सकी। जम्मू के कार्यकर्ता रमन कुमार शर्मा की ओर से किश्तवाड़ जिला प्रशासन के पास दायर आरटीआई आवेदन से इस आपदा की आधिकारिक जानकारी मिली है।

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