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हरियाणा में बदलेंगे जमीन इस्तेमाल के नियम, अब ‘प्रतिबंधित नहीं तो अनुमति’ का प्रस्ताव

डेवलपमेंट प्लान के हर जोन में प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची बनेगी; सरकार ने 30 दिन में मांगी आपत्तियां और सुझाव

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हरियाणा में डेवलपमेंट प्लान के तहत जमीन के इस्तेमाल के नियम बदलने की तैयारी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक डॉ. जे. गणेशन ने 30 सितंबर को इस संबंध में पब्लिक नोटिस जारी किया है। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग जोन में यह तय किया जाता है कि वहां कौन-कौन सी गतिविधियां की जा सकती हैं। अब इसे बदलकर प्रत्येक जोन के लिए उन गतिविधियों की सूची बनाने का प्रस्ताव है, जो वहां नहीं की जा सकेंगी। यानी किसी जोन में जिस गतिविधि पर रोक नहीं होगी, वह संबंधित नीति और जरूरी शर्तें पूरी करने पर की जा सकेगी। विभाग ने प्रस्तावित बदलाव पर 30 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक डॉ. जी. गणेशन ने यह पब्लिक नोटिस जारी किया है।

घरों के बीच उद्योग से लेकर वेयरहाउस तक नहीं लगेंगे

रिहायशी जोन में औद्योगिक इकाइयां और औद्योगिक कॉलोनियां नहीं बन सकेंगी। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, रीसाइक्लिंग यूनिट, रेडी मिक्स कंक्रीट और हॉट मिक्स प्लांट, आईटी पार्क, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस और गैस गोदाम भी प्रतिबंधित रहेंगे। थोक कारोबार, ट्रांसपोर्ट नगर, ट्रांसपोर्ट डिपो, एयरपोर्ट और एयर स्टेशन, रेलवे यार्ड व साइडिंग, बस टर्मिनल और डिपो, ट्रक पार्किंग, माल की लोडिंग-अनलोडिंग के क्षेत्र तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी रिहायशी जोन में नहीं हो सकेंगे। कचरा प्रबंधन स्थल, शवदाह या दफन स्थल, स्लॉटर हाउस, डेयरी-पोल्ट्री फार्म, खनन, स्टोन क्रशिंग और खतरनाक कारोबार पर भी रोक प्रस्तावित है।

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कमर्शियल जमीन पर कॉलोनी और उद्योग को जगह नहीं

कमर्शियल जोन में रिहायशी कॉलोनियां और औद्योगिक इकाइयां प्रतिबंधित रहेंगी। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, रीसाइक्लिंग यूनिट, आईटी पार्क, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स पार्क भी यहां नहीं हो सकेंगे। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कचरा प्रबंधन स्थल, गैस इंस्टॉलेशन व गैस वर्क्स, शवदाह और दफन स्थल, स्लॉटर हाउस तथा टेनरी भी प्रतिबंधित होंगे। कृषि, बागवानी, डेयरी-पोल्ट्री फार्मिंग, खनन, स्टोन क्रशिंग और खतरनाक कारोबार को भी इस जोन से बाहर रखा गया है।

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इंडस्ट्रियल एरिया में घर और स्कूल नहीं बनेंगे

इंडस्ट्रियल जोन में रिहायशी और कमर्शियल कॉलोनियां नहीं बन सकेंगी। शैक्षणिक संस्थानों को भी प्रतिबंधित किया गया है। कृषि, बागवानी, डेयरी और पोल्ट्री फार्मिंग भी इस जोन में नहीं हो सकेगी। ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में रिहायशी-कमर्शियल कॉलोनियों के साथ रेड कैटेगरी उद्योग, वेस्ट-टू-एनर्जी और रीसाइक्लिंग यूनिट, आईटी पार्क, संस्थागत इस्तेमाल तथा कृषि, बागवानी, डेयरी और पोल्ट्री गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

सरकारी सुविधाओं वाले जोन में भी कई काम बाहर

पब्लिक और सेमी-पब्लिक जोन में औद्योगिक इकाइयां और कॉलोनियां, रिहायशी-कमर्शियल कॉलोनियां, वेस्ट-टू-एनर्जी और रीसाइक्लिंग यूनिट, आईटी पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, गैस गोदाम, थोक कारोबार, ट्रांसपोर्ट नगर और माल टर्मिनल प्रतिबंधित रहेंगे। कचरा प्रबंधन स्थल, गैस इंस्टॉलेशन, स्लॉटर हाउस, टेनरी, फिश मार्केट तथा कृषि, बागवानी, डेयरी और पोल्ट्री फार्मिंग भी इस जोन में नहीं हो सकेगी।

पब्लिक यूटिलिटी की जमीन पर होटल से अस्पताल तक नहीं

पब्लिक यूटिलिटी जोन में रिहायशी और कमर्शियल कॉलोनियों के साथ होटल समेत कमर्शियल प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य संस्थान, धार्मिक-सामाजिक और मनोरंजन गतिविधियां, क्लब, कम्युनिटी सेंटर और बैंक्वेट हॉल प्रतिबंधित होंगे। औद्योगिक इकाइयां, सर्विस गैरेज और डिस्प्ले सेंटर, आईटी पार्क व डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट नगर तथा डेयरी-पोल्ट्री फार्मिंग को भी इस सूची में रखा गया है।

खुले क्षेत्र में पार्क-ग्रीन बेल्ट के अलावा बाकी पर रोक

ओपन स्पेस जोन में पार्क, ग्रीन बेल्ट, जल निकाय, खेल गतिविधियां, सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं, फ्यूल स्टेशन, सार्वजनिक परिवहन से जुड़ा ढांचा, मनोरंजन गतिविधियां तथा शवदाह और दफन स्थल की अनुमति रहेगी। इनके अलावा बाकी सभी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। कृषि जोन में रिहायशी और कमर्शियल कॉलोनियां तथा रेड कैटेगरी उद्योग नहीं हो सकेंगे। डेटा सेंटर को छोड़कर आईटी प्रतिष्ठानों को भी प्रतिबंधित सूची में रखा गया है। नेचुरल कंजर्वेशन और स्पेशल जोन में संबंधित डेवलपमेंट प्लान में अनुमत गतिविधियों के अलावा बाकी इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा।

मौजूदा जोनिंग व्यवस्था भी बदलेगी

बदलाव केवल नई प्रतिबंधित सूची बनाने तक सीमित नहीं है। विभाग ने डेवलपमेंट प्लान के व्याख्यात्मक नोट में मौजूदा जोनिंग प्रावधानों को बदलने का प्रस्ताव रखा है। अभी इसमें अलग-अलग लैंड यूज जोन के लिए अनुमत गतिविधियों की व्यवस्था है। प्रस्ताव के मुताबिक इस व्यवस्था को हटाकर प्रतिबंधित गतिविधियों को आधार बनाया जाएगा। साथ ही प्रकाशित सभी डेवलपमेंट प्लान के व्याख्यात्मक नोट में शामिल एक मौजूदा परिशिष्ट को हटाने का प्रस्ताव भी है।

प्रतिबंध नहीं होगा तो भी नियमों से मिलेगी मंजूरी

नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि प्रतिबंधित सूची से बाहर आते ही किसी गतिविधि को अपने-आप मंजूरी मिल जाएगी। विभाग ने कहा है कि ऐसी गतिविधियां संबंधित नीतिगत प्रावधानों के अनुसार ही अनुमत होंगी। यानी जमीन का जोन, निर्माण के नियम और दूसरी लागू शर्तें फिर भी देखी जाएंगी।

जनहित में अतिरिक्त रोक और छूट भी संभव

प्रस्ताव में डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को जनहित में सूची में दर्ज गतिविधियों के अलावा किसी अन्य इस्तेमाल को भी प्रतिबंधित करने का अधिकार दिया गया है। दूसरी तरफ सरकार को कानून की धारा 7ए के तहत जनहित में किसी गतिविधि पर लगी रोक में छूट देने का अधिकार रहेगा।

30 दिन बाद होगा प्रस्ताव पर फैसला

फिलहाल यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। सार्वजनिक नोटिस जारी होने के 30 दिन बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के साथ प्रस्तावित जोनिंग नियमों पर सरकार विचार करेगी। लोगों को लिखित रूप में या विभाग की ओर से दिए गए ईमेल के माध्यम से अपनी आपत्ति और सुझाव भेजने होंगे। विभाग ने यह पूरी कवायद केंद्र सरकार के कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डी-रेगुलेशन के दूसरे चरण से जोड़ते हुए ‘जब तक प्रतिबंधित नहीं, तब तक अनुमति’ की व्यवस्था की दिशा में कदम बताया है।

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