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Kurukshetra Hospital Case: महिलाओं का गुस्सा फूटा, पूछा- आखिर किसके संरक्षण में मिला आरोपी डॉक्टर को दोबारा सरकारी पद?

Kurukshetra Hospital Case: जनवादी महिला समिति ने उठाए नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

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Kurukshetra Hospital Case: पुलिस गिरफ्त में आरोपी डॉक्टर। फाइल फोटो हप्र
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Kurukshetra Hospital Case:  सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की घटना को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनवादी महिला समिति ने इस मामले को केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सरकारी जवाबदेही और स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर विफलता का मामला बताते हुए कई तीखे सवाल उठाए हैं।

संगठन ने मांग की है कि आरोपी को कठोरतम सजा दिलाने के साथ-साथ उन अधिकारियों और तंत्र की भी जवाबदेही तय की जाए, जिन्होंने विवादित पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को दोबारा सरकारी अस्पताल में जिम्मेदारी सौंपी।

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समिति की राज्य अध्यक्ष सविता और राज्य सचिव उषा सरोहा ने संयुक्त बयान में कहा कि यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। जिस अस्पताल में मरीज सुरक्षा और उपचार की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं यदि एक नाबालिग बच्ची को दरिंदगी का शिकार होना पड़े तो यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का भी प्रतीक है।

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‘अस्पताल में सुरक्षित नहीं बेटियां तो जवाब दे सरकार’

महिला नेताओं ने कहा कि प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन कुरुक्षेत्र की घटना ने उन दावों की हकीकत उजागर कर दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके थे, उसे सेवानिवृत्ति के बाद संविदा आधार पर सरकारी अस्पताल में दोबारा नियुक्ति कैसे दी गई? क्या नियुक्ति से पहले उसका रिकॉर्ड नहीं देखा गया या फिर नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया? उन्होंने कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में ऐसी नियुक्ति को मंजूरी दी गई।

केवल गिरफ्तारी नहीं, पूरी व्यवस्था की हो जांच

जनवादी महिला समिति का कहना है कि केवल आरोपी की गिरफ्तारी से न्याय पूरा नहीं होगा। यह भी जांच का विषय है कि ऐसी घटना अस्पताल परिसर के भीतर कैसे हुई और सुरक्षा व्यवस्था कहां नाकाम रही। संगठन ने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई, मिले कठोरतम सजा

समिति ने मांग की कि पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में दैनिक आधार पर करवाई जाए ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके। संगठन का कहना है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में त्वरित न्याय ही समाज में विश्वास कायम कर सकता है।

सभी सरकारी अस्पतालों का हो सुरक्षा ऑडिट

महिला संगठन ने राज्य सरकार से प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों, विशेषकर महिला और बाल वार्डों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की। समिति का कहना है कि अस्पतालों में निगरानी तंत्र, सीसीटीवी व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।

पीड़ित परिवार को मिले सुरक्षा और कानूनी सहायता

समिति ने कहा कि पीड़ित बच्ची और उसके परिवार को कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि उन पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक, सामाजिक या प्रशासनिक दबाव न बनाया जा सके।

जनवादी महिला समिति ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई बरती गई या प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास हुआ, तो संगठन प्रदेशभर की महिलाओं को लामबंद कर व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगा। समिति ने कहा कि यह केवल एक बच्ची के न्याय का सवाल नहीं, बल्कि प्रदेश की हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान का प्रश्न है।

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