दक्षिण हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई का बड़ा सियासी दांव: बिना पार्टी के बैनर-झंडे के चरखी दादरी में दिखाई ताकत
शगुन गार्डन में ‘स्नेह मिलन’ के बहाने शक्ति प्रदर्शन; बोले- साथी किसी भी दल में हों, संघर्ष के लोग आज भी मेरे साथ खड़े हैं
पूर्व सांसद एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई ने दक्षिण हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर अपनी सक्रियता के संकेत दे दिए हैं। चरखी दादरी के शगुन गार्डन में आयोजित ‘स्नेह मिलन’ कार्यक्रम के जरिए बिश्नोई ने भारी भीड़ जुटाकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में उनके साथ विधायक रणधीर पनिहार भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि दक्षिण हरियाणा में हुआ यह आयोजन बिना पार्टी के बैनर, पोस्टर या झंडों के संपन्न हुआ। कार्यक्रम स्थल पर समर्थकों ने कुलदीप बिश्नोई का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया और उन्हें ऊंट पर बैठाकर कार्यक्रम में लाया गया।
मीडिया से बातचीत में कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि दादरी को मैंने हमेशा अपना परिवार और अपना मजबूत गढ़ माना है। जब मैं भिवानी-महेंद्रगढ़ से पहली बार सांसद चुना गया था, तब भी मेरा स्वागत ऊंट पर बैठाकर किया गया था और वह दौर मेरे लिए बेहद शुभ साबित हुआ था। आज का यह स्वागत मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है। जिस प्रकार दादरी की जनता ने भाई रणधीर पनिहार और मेरा ऐतिहासिक स्वागत किया है, उसके लिए मेरे पास आभार जताने के लिए शब्द कम हैं। आज एक से बढ़कर एक स्वागत समारोह देखने को मिले हैं।
चाहे किसी दल में हों या घर बैठे, साथी आज भी मेरे साथ, दिया सियासी संकेत
बिना पार्टी सिंबल के जुटे हुजूम पर कुलदीप बिश्नोई ने स्पष्ट सियासी बयान देते हुए कहा कि आज सड़क से लेकर पंडाल तक उमड़ी भीड़ में वही चेहरे हैं, जो उनके संघर्ष के दिनों के साथी रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे साथी चाहे आज घर बैठे हों या किसी भी राजनीतिक दल में हों, आज चेहरे देखकर साफ पता चलता है कि वे सब हमारे संघर्ष के पुराने साथी हैं और दिल से हमारे साथ खड़े हैं। दादरी ने आज फिर साबित कर दिया है कि हमारा यह रिश्ता अटूट है।
दक्षिण हरियाणा में नए सियासी समीकरणों की सुगबुगाहट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के झंडे और औपचारिक मंच के बिना दादरी में कुलदीप बिश्नोई का यह आयोजन दक्षिण हरियाणा में अपने पुराने वोट बैंक और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। बिश्नोई द्वारा अपने पुराने समर्थकों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर साथ लाने का यह बयान आने वाले दिनों में क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।

