Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

पंजाब में कल से किसान मजदूर मोर्चा का पांच दिवसीय प्रदर्शन, AAP मंत्रियों के घरों का घेराव

स्पीकर कुलतार सिंह संधवां समेत आठ AAP नेताओं के आवासों के बाहर धरना; धान के लिए बिजली-खाद संकट से लेकर MSP, कर्ज माफी और लैंड पूलिंग नीति वापस लेने तक कई मांगें

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
ट्रिब्यून फाइल फोटो
Advertisement

पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को किसानों के मोर्चे पर सोमवार से एक और आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) सोमवार से पांच दिवसीय प्रदर्शन शुरू करेगा। इसके तहत पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और AAP के सात मंत्रियों के आवासों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इनमें पंजाब AAP के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा भी शामिल हैं।

इससे पहले भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) ने शनिवार से ही पंजाब सरकार के मंत्रियों के घेराव का अभियान शुरू कर दिया है। ऐसे में KMM के आंदोलन से किसानों का विरोध अब सीधे तौर पर सत्तारूढ़ AAP के नेताओं और उनके राजनीतिक ठिकानों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

Advertisement

KMM का यह प्रदर्शन ऐसे समय शुरू हो रहा है जब करीब दो सप्ताह पहले मोर्चे ने राज्य के सभी 22 जिलों में उपायुक्त कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया था। इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने भी पिछले सप्ताह चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिवसीय धरना दिया था।

Advertisement

16 सितंबर को आंदोलन तेज करने पर फैसला

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और बातचीत शुरू नहीं की गई तो KMM 16 सितंबर की बैठक में आंदोलन को और तेज करने का फैसला करेगा।

फिलहाल आंदोलन का तात्कालिक मुद्दा धान की फसल के लिए बिजली आपूर्ति और खाद की उपलब्धता से जुड़ा संकट है। हालांकि, किसानों की मांगों का दायरा इससे काफी व्यापक है। इनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), किसानों का कर्ज, नदी जल, भूमि अधिग्रहण, नशे की समस्या, बेरोजगारी और केंद्र के साथ पंजाब के संबंध जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की MSP पर खरीद की मांग

KMM की प्रमुख मांगों में बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की सरकारी खरीद MSP पर सुनिश्चित करना शामिल है। किसान संगठनों ने किसानों और खेत मजदूरों का पूर्ण कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा आत्महत्या करने वाले किसानों और खेत मजदूरों के परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की जा रही है। बाढ़, गिरते भूजल स्तर और प्रदूषण से निपटने के लिए भी व्यापक नीति बनाने की मांग किसानों ने रखी है।

लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग

किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही भारतमाला परियोजना के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने और पाकिस्तान के साथ वाघा के रास्ते व्यापार मार्ग खोलने की मांग भी शामिल है।

किसानों ने बीज अधिनियम, 2025 और सहकारी समितियां अधिनियम, 2026 के अलावा मनरेगा की जगह लाए जा रहे कानूनों तथा बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025 के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है।

किसानों ने प्रीपेड बिजली मीटरों का भी विरोध किया है। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर पंजाब सरकार से विधानसभा में स्पष्ट रूप से विरोध दर्ज कराने की मांग की है।

इन नेताओं के आवासों पर होगा प्रदर्शन

KMM के पांच दिवसीय प्रदर्शन के तहत जिन नेताओं के आवासों के बाहर प्रदर्शन प्रस्तावित है, उनमें शामिल हैं...

  • कुलतार सिंह संधवां — फरीदकोट
  • हरभजन सिंह ईटीओ — जंडियाला
  • अमन अरोड़ा — सुनाम
  • लाल चंद कटारूचक — भोआ
  • रवजोत सिंह — होशियारपुर
  • गुरमीत सिंह खुड्डियां — मुक्तसर
  • मोहिंदर भगत — जालंधर
  • हरदीप सिंह मुंडियां — लुधियाना

सरकार पर बढ़ता राजनीतिक दबाव

मंत्रियों और विधानसभा स्पीकर के आवासों तक प्रदर्शन ले जाने का फैसला किसान आंदोलन के राजनीतिक रूप से अधिक मुखर होने का संकेत माना जा रहा है। पंजाब सरकार के सामने पहले से ही कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ विभिन्न मांगों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में किसान संगठनों के लगातार आंदोलनों से सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ सकता है।

KMM ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार किसानों की मांगों पर बातचीत के लिए आगे नहीं आती तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। 16 सितंबर की बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Advertisement
×