खालिदा जिया का निधन : बांग्लादेश की सियासत में खत्म हुआ एक युग
Sheikh Hasina शेख हसीना की आजीवन प्रतिद्वंद्वी रहीं
Sheikh Hasina : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और शेख हसीना की आजीवन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जिया का जाना उस दौर का अंत है, जिसने एक पूरी पीढ़ी तक बांग्लादेश की राजनीति को आकार दिया।
खालिदा जिया और शेख हसीना की टकराहट सत्ता, विचारधारा और जनभावनाओं का प्रतीक रही। दोनों नेताओं के बीच दशकों तक चली यह प्रतिद्वंद्विता देश की लोकतांत्रिक राजनीति की धुरी बन गई।
पिछले कुछ हफ्तों से जिया गंभीर रूप से बीमार थीं। उन्हें ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया। मेडिकल बोर्ड के सदस्य जियाउल हक के अनुसार, उन्हें नियमित रूप से किडनी डायलिसिस की जरूरत थी। सोमवार देर रात उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
जनवरी 2025 में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अंतिम भ्रष्टाचार मामले में बरी किया था, जिससे आगामी फरवरी चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने की संभावना बढ़ गई थी। उन्होंने इन सभी मामलों को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया था।
बीमार रहने के बावजूद वह ब्रिटेन में इलाज के बाद मई में स्वदेश लौटीं। दिलचस्प बात यह रही कि अंतरिम सरकार ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दी थी, जबकि शेख हसीना की सरकार ने पहले उनके ऐसे 18 अनुरोध खारिज किए थे।
जिया के राजनीतिक जीवन की जड़ें उस त्रासदी में हैं, जब उनके पति पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 1981 में एक सैन्य तख्तापलट के दौरान हत्या कर दी गई थी। उसी के बाद उन्होंने सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका और 1990 में तानाशाही के पतन में अहम भूमिका निभाई।
खालिदा जिया ने 1991 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला और 2001 में दूसरी बार सत्ता में लौटीं। दोनों कार्यकालों में उनकी सबसे बड़ी चुनौती रहीं शेख हसीना, जो उनके बाद देश की सबसे शक्तिशाली नेता बनकर उभरीं।

