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Kedarnath Dham: केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले, ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंजा धाम

Kedarnath Dham: छह माह बाद खुले ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के द्वार; सीएम पुष्कर सिंह धामी रहे मौजूद, चारधाम यात्रा ने पकड़ी रफ्तार

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केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर मौजूद सीएम पुष्कर सिंह धामी व अन्य श्रद्धालु। फोटो स्रोत उत्तराखंड डीपीआर एक्स अकाउंट
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Kedarnath Dham: छह माह की शीतकालीन समय के बाद बुधवार सुबह केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोल दिए गए। समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव के इस पवित्र धाम में सुबह आठ बजे विशेष पूजा-अर्चना के बाद द्वार खोले गए।

इस दौरान मंदिर परिसर ‘बम-बम भोले’ और ‘जय बाबा केदार’ के जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था और ‘सांब सदाशिव’ की आकर्षक पुष्प सज्जा ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

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इससे पहले अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले गए थे। वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार को खुलेंगे, जिसके साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा पूरी तरह शुरू हो जाएगी।

हर वर्ष सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण चारों धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, जिन्हें अप्रैल-मई में पुनः खोला जाता है। पिछले वर्ष करीब 51 लाख श्रद्धालुओं ने इन धामों के दर्शन किए थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम सहित चारों धाम उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक पहचान हैं और राज्य सरकार तीर्थयात्रियों को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यात्रा व्यवस्थाओं की वह स्वयं नियमित समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि यात्रा मार्गों, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्थाओं को उच्च स्तर पर बनाए रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सभी आवश्यक प्रबंध समय से पूर्व सुनिश्चित किए जाएं।

यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी

केदारनाथ पैदल दूरी कितनी है?

केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16-18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है।

पैदल यात्रा कहां से शुरू होती है?

यह यात्रा गौरीकुंड से शुरू होती है, जो केदारनाथ का बेस कैंप माना जाता है।

केदारनाथ धाम का महत्व क्या है?

केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह धाम महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां पांडवों ने भगवान शिव की आराधना की थी।

ऋषिकेश से यात्रा मार्ग क्या है?

यात्रा आमतौर पर ऋषिकेश से शुरू होती है। मार्ग इस प्रकार है:

ऋषिकेश-देवप्रयाग-श्रीनगर-रुद्रप्रयाग-गुप्तकाशी-सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ

जाने के साधन क्या हैं?

बस/टैक्सी से सोनप्रयाग या गौरीकुंड तक

गौरीकुंड से पैदल/घोड़ा/पालकी

हेलीकॉप्टर सेवा (फाटा, गुप्तकाशी, सिरसी से)

पीएम ने कहा- केदारनाथ धाम और चारधाम की यात्रा हमारी आस्था की प्रतीक

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर अपनी भावनाएं व्यक्त की। उन्होंने लिखा, देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। केदारनाथ धाम और चारधाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी होते हैं।

पीएम ने लिखा इस वर्ष चारधाम यात्रा के आरंभ उत्सव पर, उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए मैंने एक पत्र के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। मेरी कामना है कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और आपकी यात्राओं को शुभ करें। हर-हर महादेव!

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