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Kanwar Yatra : एक पलड़े में गंगाजल, दूसरे में 105 वर्ष की मां ... कांवड़ में बैठाकर 200 KM पैदल चला बेटा

अपनी मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर संभल लौटा बेटा-पोता

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प्रतीकात्मक चित्र
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Kanwar Yatra : सावन माह में लाखों कांवड़िये जहां भक्ति और श्रद्धा के साथ गंगाजल लेकर आ रहे हैं, वहीं संभल के एक शिवभक्त ने अपनी कांवड़ को मातृसेवा का रूप देकर सबको भावुक कर दिया। चंदौसी तहसील के खेतापुर गांव के जोगिंदर (52) ने अपने बेटे प्रमोद (26) के साथ 105 वर्षीय मां हरदेई को हरिद्वार से कांवड़ में बैठाकर करीब 200 किलोमीटर पैदल चलकर सोमवार को घर लौटे।

मातृभक्ति और शिवभक्ति की प्रशंसा

जोगिंदर के कंधों पर कांवड़ के एक पलड़े में 28 लीटर गंगाजल था तो दूसरे पलड़े में साक्षात उनकी मां बैठी थीं। जहां-जहां से यह अनोखी कांवड़ गुजरी, लोगों ने नमन किया। प्रत्यक्षदर्शियों ने इस प्रयास की खूब सराहना की। जैसे ही जोगिंदर अपनी कांवड़ के साथ संभल पहुंचे, सड़क किनारे श्रद्धालुओं और राहगीरों की भीड़ जुट गई। पूरे रास्ते लोग उनकी मातृभक्ति और शिवभक्ति की प्रशंसा करते रहे।

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एक पलड़े में गंगाजल और दूसरे में मां

जोगिंदर ने बताया कि मेरा सपना था कि अपनी 105 वर्षीय मां को हरिद्वार में गंगा स्नान कराऊं। इसलिए अपने बेटे के साथ हरिद्वार गया और वहां से कांवड़ के एक पलड़े में गंगाजल और दूसरे में मां को बैठाकर पैदल लौट आया। वे 28 जुलाई को हरिद्वार से चले थे और नौ दिन बाद आज संभल पहुंचे हैं। अब मंगलवार को शिव तेरस पर वे अपनी मां के साथ गंगाजल से भोले बाबा का जलाभिषेक करेंगे।

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कांवड़ का वजन करीब 65 किलो

जोगिंदर के पुत्र प्रमोद ने कहा कि हमारा और पिताजी का सपना था कि दादी को एक बार गंगा स्नान कराकर लाएं। इस बार मौका मिला तो पूरा कर दिया। हरिद्वार से यहां तक आने में नौ दिन लगे। इस कांवड़ का वजन करीब 65 किलो है, जिसमें 28 लीटर गंगाजल है। यह आस्था थी तो ले आए, सपना पूरा हो गया।

मातृभक्ति की सबसे अनोखी मिसाल

हरदेई ने कहा कि मेरे बेटे और पोते ने बहुत बढ़िया काम किया है। मुझे बहुत खुशी है। यह कहते हुए वह भावुक हो गईं। लोगों का कहना है कि जोगिंदर की यह कांवड़ इस श्रावण में मातृभक्ति की सबसे अनोखी मिसाल बन गई है।

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