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एमबीए छात्रा से रेप-हत्या 15 साल बाद इंसाफ, सीरियल किलर को उम्रकैद

2020 में बंद हो चुका था केस, कत्ल के अन्य मामले की जांच में 14 साल बाद पकड़ में आया हत्यारा

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नेहा (इनसेट में) की स्कूटी िदखाते परिजन । फ़ाइल फ़ोटो
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चंडीगढ़ में एमबीए छात्रा नेहा अलावत से रेप और हत्या के 15 साल बाद शुक्रवार को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ‘सीरियल किलर’ मोनू कुमार (35) को उम्रकैद की सजा सुनाई। उसे बृहस्पतिवार को दोषी करार दिया गया था। जज, डॉ. यशिका ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जज ने सजा सुनाते हुए कहा, ‘दोषी का अपराध अदालत की किसी भी सहानुभूति के योग्य नहीं है। अदालत का मानना है कि समाज की सुरक्षा के लिए, सामूहिक चेतना की एक वैध प्रतिक्रिया के रूप में, दोषी को सजा देना अनिवार्य है। दूसरे शब्दों में, यह अदालत का समाज के प्रति दायित्व है।’ हालांकि, अदालत ने इसे दुर्लभ से दुर्लभतम मामला नहीं माना।

साल 2010 में हुई इस वारदात के बाद करीब 14 साल तक मोनू पुलिस से बचता रहा। वह इतना शातिर था कि अपने पास मोबाइल भी नहीं रखता था। तमाम कोशिशों के बाद भी कोई सुराग न मिलने पर पुलिस ने 2020 में अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। लेकिन, गत् वर्ष चंडीगढ़ पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाते हुए सेक्टर-38 की शाहपुर काॅलोनी के रहने वाले मोनू कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

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सेक्टर-38 की रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा 30 जुलाई, 2010 को घर से कोचिंग के लिए निकली थी। रात नौ बजे तक वह नहीं लौटी तो परिजनों ने तलाश शुरू की। सेक्टर-39 के पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवाई गई। सेक्टर-38 के एक टैक्सी स्टैंड के पास उसकी स्कूटी मिली, जिस पर खून के निशान थे। आसपास के इलाके में खोज शुरू की तो मलोया के जंगल में झाड़ियों के बीच उसका शव मिला। उसके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया

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गया था।

एक केस में छूटने के बाद तीन कत्ल : माेनू को सबसे पहले वर्ष 2008 में हिमाचल के चंबा क्षेत्र में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और नुकीले पत्थर से सिर पर वार कर उसकी हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन पुख्ता सुबूत नहीं होने के कारण वह अदालत से बरी हो गया। इसके कुछ महीने बाद उसने 2010 में एमबीए छात्रा के साथ दुष्कर्म किया और उसके सिर पर भी नुकीले पत्थर से वार कर हत्या कर दी। फिर वर्ष 2022 में मलोया के जंगल में एक विवाहिता के साथ भी ऐसी ही वारदात को अंजाम दिया। फरवरी 2024 में उसने 65 साल की बुजुर्ग महिला की हत्या की और दुष्कर्म करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने इलाके में जांच तेज करते हुए डीएनए टेस्ट के लिए घर-घर जाकर सैंपल लेने शुरू किये। इसी दौरान उसे शक के आधार पर उसका डीएनए सैंपल लिया गया। महिला के कपड़ों पर मिले सीमन का उसके डीएनए से मैच हो गया। नेहा के शव से मिले डीएनए से भी मैच हो गया।

‘ऐसे जानवर को मौत की सजा मिले’

कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद, पीड़िता नेहा अहलावत के पिता राजबीर ने कहा कि दोषी मौत की सजा का हकदार है। उन्होंने कहा, ‘वह एक जानवर है और उसे समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। परिवार को उसके लिए मृत्युदंड की उम्मीद थी।’ परिवार पुलिस जांच से खुश है, क्योंकि इतने साल बाद मामला फिर से खोला गया। राजबीर ने कहा कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं खोई और उन्हें दृढ़ विश्वास था कि आरोपी एक दिन पकड़ा जाएगा।

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