Jhiram Ghati Attack: झीरम घाटी हमले में बड़ा फैसला, 10 दोषियों को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को बुधवार को मृत्युदंड सुनाया। हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। NIA के अधिवक्ता दिनेश पानिग्रही ने बताया कि जगदलपुर में एनआईए के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने 5 सितंबर को दो महिलाओं समेत 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और और सजा पर अपना फैसला 16 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया था।
पानिग्रही ने कहा कि अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के कुल 101 गवाहों से जिरह की गई और कई दस्तावेजी सबूत पेश किए गए। मामले में कुल आरोपियों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर पानिग्रही ने कहा कि प्राथमिकी में कई ज्ञात और अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ सुनवाई शुरू की गई थी। उनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। अन्य 10 को अदालत ने सुनवाई के बाद दोषी ठहराया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने कहा कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। NIA के अनुसार अदालत ने 10 दोषियों को भारतीय दंड संहिता (भादंसं), हथियार कानून, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया।
एजेंसी ने कहा कि यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' पर 25 मई, 2013 को हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। माओवादियों ने बारूदी सुरंग धमाका किया था, अंधाधुंध गोलीबारी की थी। काफिले पर बम फेंके, जिससे 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी तथा 35 से अधिक नागरिक और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। अभिकरण ने कहा कि घायलों में से तीन की बाद में मौत हो गई, जिससे मरने वालों की संख्या 27 हो गई। एजेंसी के मुताबिक, माओवादियों ने पीड़ितों से हथियार और गोला-बारूद, वॉकी-टॉकी सेट, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी लूट लिए।
इस हमले में मारे गए लोगों में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। NIA ने कहा कि जांच से पता चला है कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के हथियारबंद नक्सलियों ने स्थानीय समितियों और डिवीजनों के साथ मिलकर, संगठन के 'टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन' (TCOC) के तहत 'परिवर्तन यात्रा' काफिले में यात्रा कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और उनकी हत्या करने की आपराधिक साजिश रची थी।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया
घटना के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया था, लेकिन रमन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर ही जांच एनआईए को सौंप दी थी। राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग भी बनाया था।

