जयराम ठाकुर ने हिमाचल के लिए RDG बंद होने का ठीकरा सुक्खू सरकार पर फोड़ा
कहा- सुक्खू सरकार ने 16वें वित्त आयोग के सामने सही ढंग से नहीं रखा हिमाचल का पक्ष
Himachal News: नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल के लिए रैवन्यू डिफेसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद होने का ठीकरा प्रदेश की सुक्खू सरकार पर फोड़ा है। जयराम ठाकुर ने वीरवार को शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने 16वें वित्तायोग के सामने राज्य का पक्ष सही ढंग से नहीं रखा। यही कारण था कि केंद्र सरकार ने हिमाचल सहित 17 राज्यों को दी जाने वाली आरडीजी बंद कर दी।
जयराम ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरडीजी बंद होने के लिए कांग्रेस सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने आरडीजी का 16वें वित्तायोग के सामने जोरदार विरोध किया था और इसे विसंगति करार दिया था। कर्नाटक सरकार का कहना था कि वित्त आयोग को सभी राज्यों को एक समान दृष्टि से देखना चाहिए और राजस्व घाटा अनुदान को तुरंत बंद कर देना चाहिए। जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसी स्थिति में कांग्रेस किस नीति के तहत आरडीजी बंद करने का विरोध कर रही है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह अपनी ही पार्टी की कर्नाटक सरकार से पूछे कि यह दोहरे मापदंड क्यों अपना रही है।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग ने राजस्व घाटा अनुदान बंद करने के बारे में स्पष्ट संकेत दिए थे और हिमाचल की सुक्खू सरकार को सत्ता संभालने के बाद इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारी करनी चाहिए थी लेकिन सरकार अंत तक सोई रही।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि वह हिमाचल को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर और वर्ष 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने के अपने विजन का प्रदेश की जनता के सामने खुलासा करें। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अपना 3 वर्ष का कार्यकाल भाजपा और केंद्र सरकार को दोष देने में बिता दिया है लेकिन अब प्रदेश की जनता काम चाहती है।
उन्होंने कहा कि चुनावी गारंटियां पूरी करने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है न कि केंद्र सरकार की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अभी भी अपनी गलती स्वीकार कर लेनी चाहिए और जनता से यह कहते हुए माफी मांग लेनी चाहिए कि उन्होंने जोश में आकर गलत चुनावी गारंटियां दे दी थी। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार एक भी चुनावी गारंटी को अभी तक पूरा नहीं कर पाई है और आने वाले समय में सरकार को कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन देना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
जयराम ठाकुर ने दावा किया हिमाचल में विकास के अधिकांश कार्य केंद्र के पैसे से हो रहे हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को केंद्र के प्रति अपनी भाषा को संयमित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र के सामने नए सिरे से अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखें ताकि केंद्र से कुछ मदद हासिल की जा सके।
विधायक प्राथमिकता बैठकों का कोई औचित्य नहीं
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विधायक क्षेत्र विकास निधि बंद कर दी है और विधायक ऐच्छिक निधि का पैसा भी जारी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में विधायक प्राथमिकता बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा इन बैठकों में शामिल होने अथवा इनका बहिष्कार करने का फैसला आज रात तक करेगी।
हार के डर के कारण गई सरकार सुप्रीम कोर्ट
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव में हार के डर से सुप्रीम कोर्ट गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले मान लिया था कि वह 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव सम्पन्न करवा लेगी लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी डालकर सरकार ने साफ कर दिया है कि वह पंचायतों में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं चाहती।
सुक्खू सरकार ने लांघी कर्ज लेने की सभी सीमाएं
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया कि मौजूदा कांग्रेस सरकार ने कर्ज लेने की सभी सीमाएं तोड़ दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कर्ज लेने की परंपरा कांग्रेस ने ही शुरू की थी। पूर्व भाजपा सरकार ने भी कर्ज लेने की कोशिश की लेकिन सीमित मात्रा में और सिर्फ 19600 करोड रुपए का ही कर्ज 5 साल में लिया गया। लेकिन मौजूदा सुक्खू सरकार ने प्रदेश को आकंठ कर्ज में डुबो दिया है और प्रदेश की आर्थिकी को तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को अब बड़े और कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है।

