यूपीआई मर्चेंट चार्ज पर कुछ भी कहना जल्दबाजी : आरबीआई गवर्नर
बाेले- किसी काे तो चुकानी हाेगी डिजिटल भुगतान की कीमत
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट चार्ज के संबंध में सरकार के प्रस्तावित बदलावों पर टिप्पणी करना ‘बहुत जल्दबाजी’ होगी। साथ ही, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बनाए रखने और उसे बढ़ाने की एक कीमत होती है, जिसे ‘किसी न किसी को तो चुकाना ही होगा।’
डिजिटल भुगतान से जुड़े कानूनों में सरकार के प्रस्तावित संशोधनों के बाद मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने की अटकलों के बीच उन्होंने यह बात कही। ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ व्यापारियों से लिया जाने वाला डिजिटल भुगतान शुल्क है। यह वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान प्रसंस्करण करने पर व्यापारी से बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता वसूलते हैं। मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के बाद मल्होत्रा ने संवाददाताओं कहा कि डिजिटल भुगतान जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचा में निवेश जरूरी है और इसकी लागत किसी न किसी को उठानी होगी। इसके लिए दो विकल्प हैं। पहला, आम जनता कर के माध्यम से इसकी लागत उठाए। दूसरा, उपयोगकर्ता भुगतान मॉडल (यूजर पे) के तहत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ लगाया जाए।
लगातार चौथी बार रेपो रेट यथावत, नहीं बढ़ेगी ईएमआई
मुंबई : आरबीआई ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इसलगातार चौथी बार रेपो रेट यथावत, नहीं बढ़ेगी ईएमआई साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने के साथ ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा। रेपो रेट नहीं बढ़ने का मतलब है कि फिलहाल होम या ऑटो लोन पर मासिक भुगतान यानी ईएमआई नहीं बढ़ेगी। चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने कहा कि अब तक महंगाई दबाव सीमित बना हुआ है। हालांकि, खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण जोखिम बना हुआ है।

