ईरानी दूतावास ने मांगा समर्थन, भारत ने साधी चुप्पी
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार ने रविवार को चुप्पी साधे रखी, जबकि नयी दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से ‘अराजकता और आक्रामकता’ के सामने ‘खामोश न रहने’ की अपील की।...
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार ने रविवार को चुप्पी साधे रखी, जबकि नयी दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से ‘अराजकता और आक्रामकता’ के सामने ‘खामोश न रहने’ की
अपील की।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने दिन भर कोई भी औपचारिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। सूत्रों का कहना है कि नयी दिल्ली, घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है, लेकिन सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार किया।
खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि के कुछ घंटों बाद जारी एक कड़े बयान में, नयी दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास ने ईरानी नेता की ‘शहादत’ पर गहरा शोक व्यक्त किया। दूतावास ने ईरानी जनता और व्यापक मुस्लिम जगत के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस हमले के परिणामों की जिम्मेदारी वाशिंगटन और तेल अवीव की होगी।
भारत के लिए संतुलन की चुनौती
भारत के ईरान के साथ पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, जबकि वह अमेरिका और इस्राइल के साथ रणनीतिक संबंधों को गहरा कर रहा है। क्षेत्रीय संकट के समय में इस संतुलन के लिए अक्सर बहुत नपे-तुले जवाब की आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ ही दिन पहले इस्राइल की दो दिवसीय राजकीय यात्रा से लौटे हैं। क्षेत्रीय स्थिरता में नयी दिल्ली के बड़े हित दांव पर लगे हैं, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना जैसी कनेक्टिविटी पहल शामिल हैं।

