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Iran Israel War : ईरान-इजरायल युद्ध : भारत में तेल की किल्लत नहीं, बैकअप प्लान तैयार

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी चिंता, संकट खिंचा तो रूस से आयात बढ़ाएगा भारत

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Iran Israel War :  ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद पश्चिम एशिया में उपजे तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। हालांकि, भारत के लिए राहत की खबर यह है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, देश के पास कम से कम 10 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल भंडार (बफर स्टॉक) मौजूद है।

रूस और वेनेजुएला से बढ़ेगी खरीद

ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद करने की घोषणा के बाद भारत ने अपनी आकस्मिक योजनाएं सक्रिय कर दी हैं। दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है। इसके अलावा वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से भी तेल मंगाने का विकल्प खुला है।

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महंगाई का डर : 80 डॉलर तक जा सकते हैं दाम

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही आपूर्ति बाधित न हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड सात महीने के उच्च स्तर 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो कीमतें जल्द ही 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिसका असर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिख सकता है।

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15 दिन का स्टॉक सुरक्षित

भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास वर्तमान में टैंकों और ट्रांजिट में मिलाकर करीब 10 से 15 दिनों का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा, देश के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और ईंधन टैंक भी भरे हुए हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में 7 से 10 दिनों की घरेलू मांग को आसानी से पूरा कर सकते हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

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