Women Empowerment : ‘बर्न इट डाउन’: जब सुरों में फूटा विद्रोह, इप्सिता ने गीतों से तोड़ी खामोशी की दीवार
लैंगिक असमानता और चुप्पी पर सीधा वार : ‘अब इसे जलते देखो...’, बंधन तोड़ने का साहस बनकर उभरा इप्सिता का गीत; महिला दिवस पर रिलीज गाने ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम
Women Empowerment : यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक पुकार, एक सुलगता सवाल और उसका सटीक जवाब भी है। हरियाणा की बेटी इप्सिता का नया गीत ‘बर्न इट डाउन’ (Burn It Down) आज उस हर महिला की आवाज बन गया है, जिसने कभी अन्याय को चुपचाप सहा, लेकिन अब वह खामोश रहने को तैयार नहीं है। महिला दिवस पर रिलीज हुआ यह गीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महज दो हफ्तों में इसे 23 लाख (2.3 मिलियन) से ज्यादा बार देखा जा चुका है। हालांकि, इसकी असली सफलता इसके 'व्यूज' में नहीं, बल्कि उस गहरे संदेश में है जो सीधे दिल और दिमाग पर दस्तक देता है— ‘अब वक्त है, जो गलत है उसे खत्म करने का।’
जंजीरों को तोड़ने का आह्वान
‘बर्न इट डाउन’ शीर्षक में जितनी तपिश महसूस होती है, इसकी सोच उससे कहीं अधिक गहरी है। यहां ‘जलाने’ का अर्थ विनाश नहीं, बल्कि उन रूढ़िवादी जंजीरों को भस्म करना है जो बचपन से लड़कियों के पैरों में डाल दी जाती हैं। ये जंजीरें उनके सपनों को सीमित करती हैं और उन्हें चुप रहने का संस्कार सिखाती हैं। यह गीत स्पष्ट संदेश देता है कि अब चुप्पी नहीं, बल्कि सार्थक प्रतिरोध का समय है।
अनदेखे संघर्षों की दास्तां
इस गीत की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह उन महिलाओं की कहानी बयां करता है, जिनकी आवाज अक्सर व्यवस्था के शोर में दब जाती है। यह घर और समाज का निस्वार्थ बोझ उठाने वाली उन महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो बिना वेतन (अवैतनिक) काम करती हैं, लेकिन उनकी कोई विशिष्ट पहचान नहीं बन पाती। इप्सिता ने अपने सुरों के माध्यम से इतिहास के पन्नों में जगह न पाने वाली इन्हीं ‘अनसुनी कहानियों’ को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है।
झकझोर देने वाले आंकड़े
गीत के बोलों में कुछ ऐसी कड़वी सच्चाइयों का समावेश है, जो समाज को आईना दिखाती हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि दुनिया भर में करीब 73.6 करोड़ महिलाएं हिंसा का शिकार हैं और 13 करोड़ लड़कियां शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। इसके अलावा, दुनिया के 75 प्रतिशत अवैतनिक घरेलू कार्यों का बोझ महिलाओं के हिस्से आता है। ये आंकड़े साबित करते हैं कि यह समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर गहरी जड़े जमाए हुए है।
पंचकूला की बेटी, वैश्विक सोच
इप्सिता मूल रूप से हरियाणा के पंचकूला (सेक्टर-7) की रहने वाली हैं और वर्तमान में चंडीगढ़ में निवास कर रही हैं। वे केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित और सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ रखने वाली विदुषी भी हैं। उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित येल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान में स्नातक किया है और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से व्यवहार विज्ञान (Behavioural Science) में एमएससी की डिग्री प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त, वे यूनिसेफ, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी कार्य कर चुकी हैं।
चुप्पी से चेतना तक का सफर
गाने की एक पंक्ति– ‘अब मुझे इसे जलाते हुए देखो’, इस पूरे रचना की आत्मा है। यह उस क्षण को परिभाषित करती है जब एक महिला मौन का त्याग कर देती है; जब सहनशीलता, प्रतिरोध का रूप लेती है और भय, शक्ति में परिवर्तित हो जाता है। ‘बर्न इट डाउन’ महज एक ट्रेंडिंग गाना नहीं, बल्कि एक नई चेतना और आंदोलन की शुरुआत है। यह हर उस महिला को समर्पित है जिसने कभी स्वयं को कमजोर महसूस किया और अब अपनी आवाज बुलंद करना चाहती है। क्योंकि अब समय चुप रहने का नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का है।

