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मुंबई की राउंडटेबल में निवेशकों ने रक्षा क्षेत्र में दिखाई सबसे ज्यादा रुचि, हिसार में डिफेंस क्लस्टर की तैयारी

जमीन और मंजूरियों की प्रक्रिया आसान करने के सुझावों पर सरकार बनाएगी टाइम-बाउंड एक्शन प्लान

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हरियाणा ने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को राज्य में निवेश के अगले बड़े क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुंबई में सोमवार को ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के तहत प्रमुख निवेशकों और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्मों के साथ हुई राउंडटेबल बैठक में डिफेंस सेक्टर को लेकर सबसे ज्यादा रुचि और सुझाव सामने आए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संकेत दिया कि सरकार जल्द डिफेंस सेक्टर के लिए नई नीति ला सकती है। हिसार स्थित महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के आसपास डिफेंस क्लस्टर विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल, सुशील सारवान व सुनील शर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे। निवेश क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के एमडी, फाउंडर और सीईओ ने हरियाणा में निवेश की संभावनाओं और मौजूदा व्यवस्था को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

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डिफेंस में निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी

राउंडटेबल में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े उद्योगों को लेकर निवेशकों ने विशेष रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र को लेकर सबसे ज्यादा सुझाव आए हैं। सरकार इन्हें ध्यान में रखते हुए डिफेंस सेक्टर की अलग नीति तैयार करने पर विचार कर रही है। सीएम ने कहा कि सरकार का फोकस केवल अलग-अलग इकाइयां लगाने तक सीमित नहीं है।

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डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों को एक साथ विकसित करने के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम किया जा रहा है। हिसार में महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इसी क्षेत्र में डिफेंस क्लस्टर विकसित करने की संभावना पर भी काम होगा। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट के आसपास हरियाणा की सीमा में एक अन्य औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना पर भी काम आगे बढ़ रहा है। इससे एयरपोर्ट कनेक्टिविटी का लाभ औद्योगिक निवेश को देने की कोशिश है।

10 नए आईएमटी के लिए जमीन का काम आगे

राज्य सरकार ने पिछले बजट में 10 नए इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप यानी आईएमटी विकसित करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए भूमि संबंधी काम आगे बढ़ रहा है। इन औद्योगिक क्षेत्रों को डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे बड़े निवेशों के लिए तैयार करने की योजना है। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को जमीन और बुनियादी ढांचे के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े और तैयार औद्योगिक परिसरों में परियोजनाएं तेजी से लग सकें।

जमीन और मंजूरियों पर निवेशकों ने रखी बात

बैठक में निवेशकों ने केवल निवेश की संभावनाओं पर चर्चा नहीं की, बल्कि जमीन, मंजूरियों और सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़े व्यावहारिक मुद्दे भी उठाए। निवेशकों ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि किन स्तरों पर प्रक्रिया को और आसान किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में मिले सुझावों को संबंधित विभागों के साथ मिलकर टाइम-बाउंड एक्शन प्लान में बदला जाएगा।

जिन मामलों में सुधार की जरूरत होगी, उनमें संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसमें भूमि से जुड़े मामलों के अलावा विभिन्न मंजूरियों और दूसरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी काम होगा। सरकार का जोर निवेशकों को एक ही प्रक्रिया के लिए बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से बचाने पर है।

पोर्टफोलियो कंपनियों को हरियाणा लाने का न्योता

सैनी ने निवेश फर्मों से कहा कि उनकी पोर्टफोलियो कंपनियां यदि हरियाणा में विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, टेक्नोलॉजी या लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अवसर तलाश रही हैं तो राज्य सरकार की टीम उनके साथ सीधे काम करने को तैयार है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि सरकार का मकसद केवल निवेश हासिल करना नहीं, बल्कि कंपनियों के साथ लंबे समय तक काम करने की व्यवस्था बनाना है। यानी निवेश के बाद परियोजनाओं के विस्तार और संचालन से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की भूमिका रहेगी।

उद्योग की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे युवा

बैठक में निवेशकों की एक अहम जरूरत कुशल मानव संसाधन को लेकर भी सामने आई। सरकार का कहना है कि केवल जमीन और औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। नई इकाइयों के लिए प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता भी जरूरी है। इसी दिशा में आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों के साथ जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है। उद्योगों के साथ एमओयू के जरिए उनकी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण देने और युवाओं को तैयार करने पर जोर है। इससे एक तरफ उद्योगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे, वहीं दूसरी तरफ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

निवेशकों ने प्लग एंड प्ले मॉडल को सराहा

राउंडटेबल में शामिल निवेशकों ने हरियाणा की औद्योगिक नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेश प्रोत्साहन और प्लग एंड प्ले मॉडल की सराहना की। उनका कहना था कि तैयार औद्योगिक ढांचा मिलने से नई इकाइयां स्थापित करने में समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं। बैठक में ईक्यूटी, वारबर्ग पिंकस, डेविडसन केम्पनर इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इंडिया, प्रेमजी इन्वेस्ट, वॉटरफील्ड एडवाइजर्स, 360 वन अल्टरनेट्स, समारा कैपिटल, आइवीकैप वेंचर्स, ओमान इंडिया ज्वाइंट इन्वेस्टमेंट फंड, ब्लैक-सॉयल, द इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट ऑफ इंडिया-ग्रोथ अपॉर्चुनिटी फंड, ग्लोबल साउथ कैपिटल, एटॉमिक कैपिटल, एक्विलॉक कैपिटल, जशविक कैपिटल, यूनिकॉर्न वीसी और बीपीईएल इंडिया समेत कई निवेश फर्मों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अप्रैल 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट

मुंबई की बैठक को अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट’ की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों और उनकी लीडरशिप टीमों को समिट में शामिल होने का न्योता दिया। सरकार का फोकस अब निवेश प्रस्ताव जुटाने के साथ उन बाधाओं को दूर करने पर है, जिनका सामना कंपनियों को जमीन, मंजूरियों, कुशल मानव संसाधन और औद्योगिक ढांचे के स्तर पर करना पड़ता है। मुंबई की राउंडटेबल में मिले सुझावों को विभागवार कार्रवाई में बदलना इसी दिशा में अगला कदम होगा।

फडणवीस से मिले सैनी, काला अंब शौर्य स्मारक पर चर्चा

मुंबई दौरे पर पहुंचे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच विभिन्न समसामयिक मुद्दों के साथ काला अंब में तीसरे पानीपत युद्ध के शौर्य स्मारक के निर्माण को लेकर चर्चा हुई। करीब 16 एकड़ में प्रस्तावित इस स्मारक के निर्माण में हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं। बैठक में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्मारक के जरिए ऐतिहासिक विरासत और तीसरे पानीपत युद्ध से जुड़ी वीरता की गाथा को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों पर भी विचार-विमर्श किया।

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