जातिगत टिप्पणी मामले में इन्फ्लुएंसर अजीत भारती को झटका, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत
SC/ST Act के तहत प्रथम दृष्टया मामला: कोर्ट
Ajeet Bharti Caste Remarks Case : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर अजीत भारती को जातिगत टिप्पणी से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत से बड़ा झटका लगा है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध के प्रथम दृष्टया तत्व सामने आते हैं।
SC/ST Act ने बढ़ाई मुश्किल
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने 7 सितंबर को यह आदेश पारित किया। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया SC/ST Act के तहत मामला बनता है। ऐसे में अधिनियम की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर लगी वैधानिक रोक लागू होती है। इसी आधार पर अजीत भारती को राहत नहीं दी गई।
सोशल मीडिया कार्यक्रम से जुड़ा मामला
मामला नॉर्थ एवेन्यू थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनके सत्यापित X अकाउंट और YouTube पर प्रकाशित एक कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति समुदाय के एक सदस्य को लेकर कथित तौर पर जातिसूचक, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
भारती ने क्या दलील दी?
अजीत भारती की ओर से दलील दी गई कि कथित टिप्पणियों को पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए और SC/ST Act के तहत अपराध नहीं बनता। यह भी कहा गया कि मामले से जुड़ी सामग्री पहले से सार्वजनिक है, इसलिए हिरासत में लेकर पूछताछ या किसी सामग्री की बरामदगी की जरूरत नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां सिर्फ अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला लेने तक सीमित हैं। इन्हें मामले के अंतिम गुण-दोष पर राय नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिस्थितियां बदलने पर अजीत भारती कानून के तहत उपलब्ध अन्य राहत के लिए दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।

