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DGCA की ओर से नियमों में ढील के बावजूद IndiGo ने सैकड़ों उड़ानें रद्द कीं

Indigo flights cancelled: घरेलू एयरलाइन इंडिगो ने शनिवार को देश के चार प्रमुख हवाई अड्डों से 400 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। यह कदम तब उठाया गया जब एयरलाइन को नए उड़ान ड्यूटी समय और विश्राम अवधि (FDTL) मानकों...

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शनिवार को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंडिगो की बार-बार उड़ानें रद्द होने से देशभर में व्यवधान के कारण लंबी कतारों के बीच एक यात्री फूट-फूट कर रो पड़ी। एएनआई
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Indigo flights cancelled: घरेलू एयरलाइन इंडिगो ने शनिवार को देश के चार प्रमुख हवाई अड्डों से 400 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। यह कदम तब उठाया गया जब एयरलाइन को नए उड़ान ड्यूटी समय और विश्राम अवधि (FDTL) मानकों के दूसरे चरण में अस्थायी ढील मिली थी, जो अदालत के निर्देश पर लागू किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार बेंगलुरु एयरपोर्ट पर124 उड़ानें (63 प्रस्थान, 61 आगमन), मुंबई एयरपोर्ट पर 109 उड़ानें (51 प्रस्थान, 58 आगमन), दिल्ली एयरपोर्ट पर 106 उड़ानें (54 प्रस्थान, 52 आगमन) और हैदराबाद एयरपोर्ट पर 66 उड़ानें रद्द की गई।

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यह भी पढ़ें: चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर IndiGo उड़ान संकट जारी, सुबह 9 बजे तक सिर्फ 4 फ्लाइट आई, 6 गई

शुक्रवार को 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द होने के बाद इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए वीडियो संदेश में यात्रियों से माफी मांगी और कहा कि शनिवार को रद्द उड़ानों की संख्या कम रहने की उम्मीद है।

शुक्रवार को DGCA ने इंडिगो को कई छूटें दीं नाइट ड्यूटी समय की परिभाषा को रात 12 बजे से सुबह 6 बजे की बजाय रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक किया गया। अन्य अस्थायी रियायतें भी दी गईं।

पायलट संघों का कड़ा विरोध

ALPA India (एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन) ने DGCA की इस "चुनिंदा और असुरक्षित राहत" पर तीखी आपत्ति जताई है। संघ का कहना है ये रियायतें नियामकीय समानता को नष्ट करती हैं और यात्रियों को उच्च जोखिम में डालती हैं। FDTL लागू करने को रोकना अदालत के आदेशों के खिलाफ है। इससे पायलटों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

संघ ने मंत्रालय और DGCA से आग्रह किया है कि अदालत के आदेश को अक्षरशः लागू किया जाए और व्यावसायिक हितों से ऊपर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

FDTL विवाद की पृष्ठभूमि

नए FDTL नियम जनवरी 2024 में अधिसूचित हुए थे और मार्च 2024 में लागू होने थे। नियमों में बढ़ा हुआ साप्ताहिक विश्राम (48 घंटे), विस्तारित नाइट घंटों और सीमित नाइट लैंडिंग (6 से घटाकर 2) शामिल थे। इंडिगो इन नियमों का सबसे पहले विरोध करने वाली एयरलाइन थी, यह दलील देते हुए कि अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत होगी। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर DGCA ने इन्हें एक वर्ष की देरी के बाद, चरणबद्ध तरीके से लागू किया। पहला चरण जुलाई में लागू हुआ, जबकि दूसरा चरण 1 नवंबर से लागू किया गया। फिलहाल, DGCA द्वारा दी गई छूट के बावजूद इंडिगो की उड़ानों में भारी अव्यवस्था और यात्रियों की परेशानी जारी है।

इंडिगो ने जम्मू हवाई अड्डे से नौ उड़ानें बहाल की, श्रीनगर से सात उड़ानें रद्द

विमानन कंपनी इंडिगो ने शनिवार को जम्मू हवाई अड्डे से अपनी 11 में से नौ उड़ानें फिर से शुरू करने की घोषणा की लेकिन पायलटों की ‘रोस्टर' संबंधी समस्याओं के कारण श्रीनगर से सात उड़ानें रद्द कर दीं। जम्मू से उड़ानें फिर से शुरू होने से उन यात्रियों को राहत मिली, जो कई उड़ानों के रद्द होने के बाद हवाई अड्डे पर फंसे हुए थे।

इसके विपरीत, श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुल आठ उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिनमें से सात इंडिगो द्वारा संचालित थीं। अधिकारियों ने बताया कि विमानन कंपनी को शनिवार को श्रीनगर हवाई अड्डे से 36 उड़ानें संचालित करनी थीं, जिनमें से 18 आने वाली और 18 जाने वाली थीं। इंडिगो ने हालांकि रोस्टर संबंधी समस्याओं के कारण सात आने वाली और इतनी ही जाने वाली उड़ानें रद्द कर दीं। उन्होंने बताया कि एक अन्य विमानन कंपनी ने भी एक अन्य उड़ान रद्द कर दी।

अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी आना अभी बाकी है। रजनी गोयल नामक एक यात्री ने जम्मू हवाई अड्डे पर ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, “मैं दिल्ली वापस जा रही हूं।” एक विवाह समारोह में शामिल होने शहर आईं रजनी ने बताया कि बार-बार उड़ानें रद्द होने के कारण उन्हें पिछले दो दिनों में काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।

उन्होंने सेवाएं बहाल होने पर राहत जताते हुए कहा, “वे (इंडिगो) हमें उड़ान की सही स्थिति के बारे में नहीं बता रहे थे। हम हवाई अड्डे पर नौ घंटे इंतजार करते रहे। मैंने अपने बच्चे को घर पर छोड़ दिया था और वह भी मेरा इंतजार कर रहा था।” हवाई अड्डे पर फंसी हुई एक अन्य यात्री कशिश ने कहा कि हालांकि सेवाओं के आंशिक रूप से बहाल होने से कुछ राहत मिली है, लेकिन अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।

पुणे में इंडिगो की 42 और गोवा में 14 उड़ान रद्द, हवाई अड्डों पर फंसे

घरेलू विमानन कंपनी इंडिगो की परिचालन समस्याओं के पांचवें दिन पुणे हवाई अड्डे पर शनिवार को 42 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिसकी वजह से सैंकड़ों यात्रियों को परेशानी हुई। हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार देर रात तक पुणे हवाई अड्डे पर इंडिगो की 14 आने वाली (इनबाउंड) और 28 जाने वाली (आउटबाउंड) उड़ानें रद्द कर दी गईं।

पुणे हवाई अड्डा भारतीय वायुसेना के बेस के अंदर संचालित होता है। रद्द की गईं 14 इनबाउंड उड़ानों में इंदौर, दिल्ली, नागपुर, गुवाहाटी, पटना, वाराणसी, चेन्नई और चंडीगढ़ से आने वाली उड़ान शामिल हैं, जबकि विभिन्न घरेलू गंतव्यों पर जाने वाली 28 उड़ान भी रद्द की गईं। हवाई अड्डे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, और सभी टीमें संचालन को सुचारू बनाने के लिए पूरी तरह तैनात हैं।"

इस बीच गोवा के दाबोलिम हवाई अड्डे से इंडिगो की कम से कम 14 घरेलू उड़ान शनिवार को रद्द कर दी गईं, जिसके कारण यात्री एयरपोर्ट के बाहर फंसे रह गए। दाबोलिम हवाई अड्डा दक्षिण गोवा में स्थित है। हवाई अड्डे के ‘एक्स' हैंडल पर की गई एक पोस्ट के अनुसार हैदराबाद, अहमदाबाद, मुंबई, कोच्चि, कोलकाता, बेंगलुरु, दिल्ली और इंदौर के लिए उड़ान भरने वाली 14 उड़ान शनिवार दोपहर तक रद्द कर दी गईं।

क्या राम मोहन नायडू इंडिगो संकट की जिम्मेदारी लेंगे: कांग्रेस

कांग्रेस ने इंडिगो से जुड़े संकट को लेकर शनिवार को केंद्र सरकार पर ‘डुओपॉली' (सिर्फ दो कंपनियों का एकाधिकार) की नीति अपनाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू इस वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदारी लेंगे और माफी मांगेंगे।

पार्टी नेता और लोकसभा सदस्य शशिकांत सेंथिल ने यह भी कहा कि जब आठ जनवरी, 2024 को उड़ान ड्यूटी समय सीमा नियम जारी कर दिए गए थे, तो यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया कि वर्तमान स्थिति पैदा ना हो। सेंथिल ने संवाददाताओं से कहा, "वर्तमान इंडिगो संकट भाजपा सरकार द्वारा विमानन क्षेत्र में जबरन डुओपॉली (सिर्फ दो कंपनियों का एकाधिकार) बनाने की कोशिश का सीधा परिणाम है और उसकी विनाशकारी परिणति आज पूरे देश के सामने है।"

उन्होंने कहा कि पांच दिसंबर, 2025 को इंडिगो द्वारा 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द करने तथा छह दिसंबर को सैकड़ों और उड़ानों के रद्द होने से देश में हवाई यात्रा पूरी तरह ठप हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संकट उस भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) सरकार की नीतियों का पूर्वानुमानित परिणाम है, जो प्रतिस्पर्धा को कुचलने, पसंदीदा कॉरपोरेट समूहों को पुरस्कृत करने और एक पूरे राष्ट्रीय उद्योग को कुछ चुनिंदा मित्रों के हित में पुनर्गठित करने पर तुली हुई है।

सेंथिल ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा ‘‘विमानन सुरक्षा से किया गया खिलवाड़ उसकी लापरवाही की पराकाष्ठा'' को दिखाता है। उनके मुताबिक, आठ जनवरी 2024 को ‘उड़ान ड्यूटी समय सीमा' नियम जारी करने के बाद और एक जुलाई 2025 से आंशिक रूप से लागू करने के बाद, भाजपा सरकार ने इस क्षेत्रव्यापी अव्यवस्था के बीच इन महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों को शर्मनाक तरीके से वापस ले लिया। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि घोर आपत्तिजनक भी है।

पायलट को थकान से बचाने के लिए बनाए गए इन नियमों को हटाकर, भाजपा सरकार ने यात्री सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है और चालक दल की भलाई को अनिश्चितता में धकेल दिया है।" लोकसभा सदस्य ने सवाल किया, "भाजपा सरकार ने पिछले 11 वर्षों में विमानन क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी और विविध बनाने की बजाय इसे एकाधिकार और ‘डुओपॉली' में सिमटने क्यों दिया? डीजीसीए यह सुनिश्चित करने में क्यों विफल रहा कि इंडिगो जनवरी 2024 में जारी किए गए नियमों का पालन करे? क्या सरकार ने इंडिगो को कोई चेतावनी या पालन नोटिस दिया या विमानन कंपनी को नियमों से पूरी तरह बचाया गया?''

उन्होंने दावा किया कि चुनावी बॉण्ड के खुलासे यह दिखाते हैं कि ‘इंटरग्लोब समूह' (इंडिगो की प्रवर्तक कंपनी) और उसके प्रवर्तक द्वारा भारी राशि भाजपा को गई। सेंथिल ने सवाल किया कि क्या भाजपा और इंडिगो की यह वित्तीय नज़दीकी ही कारण है कि विमानन कंपनी को यात्रियों की सुरक्षा की कीमत पर भी असाधारण रियायतें दी गईं? उन्होंने यह प्रश्न भी किया कि क्या केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू इस अप्रत्याशित संकट की जिम्मेदारी लेंगे और माफी मांगेंगे या यात्रियों के फंसे रहने के बावजूद वह अपने खोखले, निरर्थक बयानों के पीछे छिपते रहेंगे? उन्होंने कहा कि अगर भाजपा की यही नीति बरकरार रही तो आने वाले समय में दूसरे क्षेत्रों में भी यही अव्यवस्था फैल सकती है।

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