India-US trade : किसान नेताओं से मिले राहुल गांधी, कहा- अन्नदाताओं के भविष्य का सौदा मंजूर नहीं
संसद भवन परिसर में राहुल गांधी और किसान नेताओं की हुई
India-US trade : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कई किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किसानों के साथ विश्वासघात है। उनके भविष्य का सौदा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संसद भवन परिसर में राहुल गांधी और किसान नेताओं की हुई। इसमें व्यापार समझौते का विरोध करने, किसानों व खेतिहर मजदूरों की आजीविका की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आंदोलन की आवश्यकता पर चर्चा की। राहुल गांधी ने इस मुलाकात का वीडियो 'एक्स' पर साझा करते हुए पोस्ट किया कि नरेन्द्र "सरेंडर" मोदी ने भारत के किसानों के साथ विश्वासघात किया है। किसान यह बात समझ चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ़ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि ''हमारे अन्नदाताओं की आजीविका पर सीधा हमला है''। संसद में आज किसान संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में उनकी चिंता साफ दिखी। महंगाई, बढ़ती लागत और एमएसपी की अनिश्चितता से जूझ रहे किसानों को अब भारी सब्सिडी और मशीनी ताकत से लैस विदेशी फसलों के सामने बिना तैयारी खड़ा किया जा रहा है। यह बराबरी की लड़ाई नहीं, एकतरफा दबाव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के खोखले आश्वासन अब नहीं चलेंगे।
किसानों के भविष्य का सौदा उनकी सहमति के बिना नहीं हो सकता। कुछ भी हो जाए, मैं और कांग्रेस पार्टी भारत के अन्नदाताओं के हक़, सुरक्षा और सम्मान के लिए उनके साथ खड़े हैं। इस व्यापार समझौते ने कृषि आयात के लिए दरवाजा खोल दिया है। जल्द ही कई अन्य फसलें भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। कांग्रेस के अनुसार, किसान संगठनों के नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध जताया।
मक्का, सोयाबीन, कपास, फलों और मेवों की खेती करने वाले किसानों की आजीविका को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उसने कहा कि किसान नेताओं, राहुल गांधी ने इस समझौते का विरोध करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों की आजीविका की रक्षा के लिए एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन की आवश्यकता पर चर्चा की।
राहुल गांधी के साथ बैठक में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के नेता सुखपाल सिंह खैरा, भारतीय किसान मजदूर यूनियन ( हरियाणा) के नेता एडवोकेट अशोक बलहारा, भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के नेता बलदेव एस. जीरा, प्रोग्रेसिव फार्मर्स फ्रंट के आर. नंदकुमार, भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के अमरजीत एस. मोहरी, आम किसान यूनियन के केदार सिरोही, किसान मजदूर मोर्चा (इंडिया) के गुरमनीत एस. मंगत, जम्मू-कश्मीर जमींदारा फोरम के हमीद मलिक, हरियाणा किसान संघर्ष समिति के धर्मवीर गोयत, कृषक समाज के ईश्वर सिंह नैन और साउथ हरियाणा किसान यूनियन तथा कुछ अन्य संगठनों के नेता सतबीर खाताना शामिल हुए।

