India-US Nuclear Deal : मनमोहन सिंह की पहल पर जयराम रमेश का दावा, कहा- 2008 परमाणु करार से आज कनाडा समझौता संभव
वर्ष 2008 के परमाणु करार के कारण संभव हुआ भारत-कनाडा यूरेनियम समझौता : कांग्रेस
India-US Nuclear Deal : कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2008 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अमेरिका के साथ परमाणु करार के कारण आज यूरेनियम की आपूर्ति तथा छोटे रिएक्टरों के निर्माण को लेकर कनाडा के साथ समझौता संभव हो पाया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष में रहते हुए भारत-अमेरिका परमाणु करार का विरोध किया था।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''भारत और कनाडा ने यूरेनियम की आपूर्ति और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर के निर्माण में सहयोग पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। तारापुर में अमेरिकी कंपनी जीई द्वारा आपूर्ति किए गए भारत के पहले वाणिज्यिक परमाणु रिएक्टर के बाद, कनाडा कलपक्कम और अन्य स्थानों पर भारी जल रिएक्टर स्थापित करने में भारत की सहायता कर रहा था।''
उन्होंने कहा, ''18 मई, 1974 को पोखरण में शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट के बाद यह सहायता रोक दी गई थी। इन रिएक्टरों को वास्तव में कनाडा ड्यूटेरियम यूरेनियम के लिए 'कैनडू' रिएक्टर कहा जाता था।'' रमेश ने कहा कि कनाडा और भारत ने आज जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, वह केवल अक्टूबर, 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के कारण ही संभव हो पाया है।
उन्होंने कहा, ''यह समझौता पूरी तरह से डॉ. मनमोहन सिंह के अडिग रहने और दृढ़ विश्वास के कारण हुआ था। इस समझौते का तब भाजपा ने पुरजोर विरोध किया था।'' भारत और कनाडा ने सोमवार को यूरेनियम एवं महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर अहम समझौतों पर हस्ताक्षर करने के साथ वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को जल्द अंतिम रूप देने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं के बीच यहां हुई बातचीत के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, छोटे एवं मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (एसएमआर), शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

