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भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम सौदा, व्यापक व्यापार समझौते को पूरा करने का संकल्प

दोनों देशों ने 2.6 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण यूरेनियम समझौते पर भी हस्ताक्षर किए

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भारत-कनाडा ने सोमवार को कूटनीतिक व आर्थिक संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए सहयोग की एक महत्वाकांक्षी रणनीति को अंतिम रूप दिया।

इस रणनीतिक साझेदारी के तहत इस वर्ष के अंत तक 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (सीईपीए) को संपन्न करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वार्षिक व्यापार को वर्तमान के 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर के पार ले जाने का संकल्प व्यक्त किया गया है। इसके अलावा दोनों देशों ने 2.6 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण यूरेनियम समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।

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दोनों नेताओं के बीच हुई यह व्यापक वार्ता इस मायने में अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह संबंधों में आए एक लंबे गतिरोध के बाद हो रही है। वर्ष 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट की संभावित संलिप्तता के निराधार आरोपों के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। उस समय उपजी तल्खी ने व्यापारिक और कूटनीतिक संवाद को लगभग बाधित कर दिया था।

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हालांकि, पिछले वर्ष मार्च में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से दोनों पक्षों ने संबंधों के पुनर्निर्माण और विश्वास बहाली के लिए उपायों की एक निरंतर श्रृंखला शुरू की। आज की बैठक इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दोनों देशों के संबंध अब उस अस्थिरता के दौर से बाहर निकलकर अधिक परिपक्व, स्थिर और भविष्योन्मुखी चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दोनों देशों ने एक नयी रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की घोषणा की। इसके प्रथम चरण के अंतर्गत, भारत सरकार और सस्काटून (कनाडा) स्थित प्रमुख कंपनी 'कैमेको' के बीच 2.6 अरब डॉलर के एक वृहद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार, कैमेको वर्ष 2027 से 2035 के बीच भारत को लगभग 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति करेगी, जो भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ईंधन की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

मोदी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमने दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हम छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (एसएमआर) तथा उन्नत रिएक्टर की प्रौद्योगिकी पर भी साथ मिलकर काम करेंगे। आर्थिक मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के विश्वास की सराहना की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि कनाडा के पेंशन कोष ने अब तक भारत में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह भारत की आर्थिक प्रगति में उनके गहरे और अटूट विश्वास का प्रतीक है। हमारा साझा लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

आर्थिक सहयोग की इस विराट क्षमता का दोहन करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए 'सीईपीए' को शीघ्र ही अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन समझौतों से दोनों ही देशों में निवेश के नए प्रवाह के साथ-साथ रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर के आसपास है, जिसे चौगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

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