India-Canada Relations : मार्क कार्नी का भारत दौरा 26 फरवरी से, इंडो-पैसिफिक रणनीति पर होगा फोकस
रणनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत-कनाडा साझेदारी को मजबूत करना होगा
India-Canada Relations : कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी से भारत की यात्रा पर आएंगे, जो एक व्यापक इंडो-पैसिफिक दौरे का हिस्सा है। नई दिल्ली में होने वाली वार्ता में व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करने व विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। कार्नी इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
चर्चा का केंद्र बिंदु वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हो रहे बदलावों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत-कनाडा साझेदारी को मजबूत करना होगा। ओटावा से जारी आधिकारिक बयानों में कहा गया है कि इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में कनाडाई श्रमिकों व व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलना है। भारत के लिए, यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब नई दिल्ली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति में विविधता लाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने और प्रमुख हिंद-प्रशांत देशों के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दोनों पक्षों द्वारा व्यापार समझौते, स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों में साझेदारी के लिए वार्ताओं को नई गति देने की उम्मीद है। प्रतिभाओं की आवाजाही और लोगों के बीच संबंध, विशेष रूप से शिक्षा और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में, वार्ताओं में प्रमुखता से शामिल होने की संभावना है। कार्नी मुंबई में व्यापारिक नेताओं से मुलाकात करेंगे, ताकि निवेश के अवसरों की पहचान की जा सके और दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह को बढ़ावा दिया जा सके। कनाडा खुद को ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, ऐसे क्षेत्र जहां भारत अपने विनिर्माण और हरित परिवर्तन की महत्वाकांक्षाओं के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक साझेदारी की सक्रिय रूप से तलाश कर रहा है।
भारत के बाद, कार्नी समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों व उन्नत प्रौद्योगिकियों पर सहयोग को और मजबूत करने के लिए ऑस्ट्रेलिया-जापान की यात्रा करेंगे। हालांकि, नई दिल्ली इस यात्रा के भारत चरण पर बारीकी से नजर रखेगी, ताकि यह पता चल सके कि ओटावा अपने सबसे बड़े हिंद-प्रशांत साझेदारों में से एक के साथ अपने संबंधों को किस प्रकार पुनर्व्यवस्थित करने का इरादा रखता है।

