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'मैं स्टूडेंट नहीं, पत्रकार हूं'... कंगना के तंज का मिला जवाब, सौरव दास बोले- Google भी दे रहा गलत जानकारी

सौरव दास ने कहा कि उनकी उम्र 28 नहीं बल्कि 27 वर्ष है

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CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत व कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के बीच बयानबाजी का विवाद और गहरा गया है। कंगना की ओर से उम्र और पेशे को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद सौरव दास ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कभी खुद को एक्टिव स्टूडेंट नहीं बताया और गूगल पर उपलब्ध जानकारी भी उनके बारे में गलत है।

सौरव दास बोले- मैं 27 साल का हूं, स्टूडेंट नहीं पत्रकार हूं

सौरव ने कहा कि उनकी उम्र 28 नहीं बल्कि 27 वर्ष है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी शिक्षण संस्थान के सक्रिय छात्र नहीं हैं, बल्कि एक पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कभी खुद को एक्टिव स्टूडेंट नहीं कहा। मैं जिंदगी का स्टूडेंट हूं और हर व्यक्ति को जिंदगी से सीखते रहना चाहिए। उन्होंने कंगना रनौत को भी जिंदगी का स्टूडेंट बनने की सलाह देते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।

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कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर साधा था निशाना

इससे पहले मंडी से लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए सौरव दास पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि गूगल पर उनकी उम्र 28 साल दिखाई देती है और उन्हें समझ नहीं आता कि वह खुद को स्टूडेंट कैसे कह सकते हैं। कंगना ने लिखा कि वह पिछले दो वर्षों से राजनीति में हैं, लेकिन बीते 20 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। सौरव की उम्र में उनके पास दो राष्ट्रीय पुरस्कार थे और वह फिल्ममेकर, कलाकार, निर्माता, स्क्रीनराइटर और उद्यमी के रूप में काम कर रही थीं। उन्होंने सौरव को कोई स्किल सीखने की सलाह भी दी।

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NEET प्रदर्शन पर भी कंगना का हमला

कंगना रनौत ने हाल ही में NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विरोध के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अभद्र भाषा और व्यक्तिगत हमले समाज के लिए गलत संदेश देते हैं। कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं भी छात्र आंदोलनों का हिस्सा लिया है, लेकिन इस तरह की भाषा उचित नहीं मानी जा सकती।

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