मांगें न मानी तो नहीं छोड़ेंगे हाईवे

मांगें न मानी तो नहीं छोड़ेंगे हाईवे

नयी दिल्ली में सिंघू बॉर्डर पर रविवार को किसान नेता मीडिया को संबोधित करते हुए। -मानस रंजन भुई

पुरुषोत्तम शर्मा/हप्र
सोनीपत 29 नवंबर

नये कृषि कानूनों के विरोध में कुंडली बार्डर पर धरना दे रहे किसान केंद्र से आर-पार के मूड में आ गए हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि सशर्त दिल्ली में वार्ता का न्योता उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि टीवी से बात करने की बजाय केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह किसानों से बातचीत करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वार्ता नहीं सौदेबाजी कर रही है, जो किसानों को मंजूर नहीं है। किसानों ने कहा कि वे तब तक हाईवे नहीं छोड़ेंगे, जब तक की उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती। किसानों ने बुराड़ी मैदान को खुली जेल बताते हुए वहां जाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उधर, केंद्र सरकार ने फिर दोहराया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है। पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान जमे हैं।

रविवार को मोर्चेबंदी की जानकारी देते हुए भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि दरअसल केंद्र सरकार को लग रहा था कि किसान आंदोलन दो-तीन दिन में कमजोर हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और यह तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अब केंद्र सरकार सशर्त वार्ता की बात कर रही है। वार्ता का यह तरीका उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जितना चाहे समय ले, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका हौसला मजबूत है और आंदोलन को तोड़ने के प्रयास कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार जितना समय लेगी, उनकी मांगें बढ़ती जाएंगी। उन्होंने अन्य प्रदेशों के किसानों से अपील की कि वह अगर दिल्ली तक नहीं पहुंच सकते तो अपने राज्यों की राजधानी में प्रदर्शन कर किसानों को समर्थन दें। उन्होंने कहा कि देशभर में किसान एक साथ आंदोलन कर रहे हैं और आने वाले दो-तीन दिन में सरकार को समझ आएगा कि किसान क्या कर सकते हैं और किस हद तक जा सकते हैं।

हरियाणा सरकार से नाराजगी

चढ़ूनी ने किसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और आंदोलन में शरारती तत्वों द्वारा उपद्रव का संदेह जताया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में किसान वर्ग शांति से बैठा है, लेकिन उन्हें संदेह है कि सरकार जाट आंदोलन की तरह शरारती तत्वों को आगे करके आंदोलन को फेल करने की कोशिश कर सकती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह निगरानी रखे और ऐसा कोई करता है, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसानों पर डंडे और पानी बरसाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों को अनाथ छोड़ दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर चढ़ूनी ने कहा कि किसान जब दिल्ली जाना चाहते थे तो उन पर वाटर केनन और आंसू गैस के गोले दागे गए अब उन्हें बुराड़ी बुलावा क्यों दिया जा रहा है।

‘मुलाकात जरूरी नहीं, मांगें मानें

पंजाब प्रांत भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष बलबीर सिंह राजोआणा ने कहा कि सशर्त दिल्ली जाने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि किसी नेता से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हो और वार्ता की जाए। अगर सरकार की नीयत साफ है तो वह लिखित में यह मान ले कि किसानों की मांग मान ली हैं। कृषि कानून वापस लिए जा रहे हैं, बिजली बिल एमएसपी पर गारंटी दी जा रही है। इतना ही काफी है। अगर गृहमंत्री अमित शाह यह बयान लिखित में देते हैं, तो किसान यहां से वापस अपने घर लौट जाएंगे।

नये कानूनों से कम हो रही किसानों की समस्याएं

नयी दिल्ली (एजेंसी) : केंद्र के नये कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसान आंदोलन के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप काफी विचार-विमर्श के बाद दिया, जिनसे किसानों को नये अधिकार और नये अवसर मिले हैं और इन अधिकारों ने बहुत कम समय में किसानों की समस्याओं को कम करना शुरू कर दिया है। मोदी ने अपने मासिक मन की बात कार्यक्रम में कहा कि भारत में खेती और उससे जुड़ी चीजों के साथ नये आयाम जुड़ रहे हैं।

कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नयी संभावनाओं के द्वार खोले हैं। किसानों की वर्षों से कुछ मांगें थीं और उन्हें पूरा करने के लिए हर राजनीतिक दल ने कभी न कभी वादा किया था, लेकिन वे कभी पूरी नहीं हुईं। पीएम ने कहा कि संसद ने काफी विचार-विमर्श के बाद कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नये अधिकार और अवसर भी मिले हैं। इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में, किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है।

सरकार ‘सत्ता के नशे में’

नये कृषि कानूनों को किसानों के लिए लाभकारी बताने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि कानूनों के समर्थन में लगातार जोर देने से साबित होता है कि सरकार ‘सत्ता के नशे में' है। कांग्रेस ने यह मांग भी की कि प्रधानमंत्री मोदी को तत्काल तीनों कृषि संबंधी कानूनों को निलंबित करने की घोषणा करनी चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया, ‘वादा था किसानों की आय दोगुनी करने का, मोदी सरकार ने आय तो कई गुना बढ़ा दी लेकिन अडानी-अंबानी की!'

उन्होंने हिंदी में ट्वीट किया, ‘जो काले कृषि कानूनों को अब तक सही बता रहे हैं, वो क्या ख़ाक किसानों के पक्ष में हल निकालेंगे? अब होगी ‘किसान की बात'।'

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